
Hyderabad हैदराबाद : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सेव केबीआर पार्क के स्वयंसेवकों ने केबीआर नेशनल पार्क के आसपास फ्लाईओवर और अंडरपास परियोजनाओं के कारण हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के विरोध में स्मारक पदयात्रा का आयोजन किया। स्वयंसेवकों ने इसे शहर के “आखिरी हरित फेफड़े” पर हमला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
आयोजकों के अनुसार, हैदराबाद में इस बार विश्व पर्यावरण दिवस का माहौल उत्सवपूर्ण नहीं रहा, क्योंकि शहर में लगातार पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों पुराने पेड़ों को, जो 2021 के स्थगन आदेश के बावजूद खड़े थे, हाल ही में कुछ ही दिनों में काट दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान स्वयंसेवकों ने केबीआर नेशनल पार्क के आसपास “खोए हुए पेड़ों” के लिए प्रतीकात्मक मौन अंतिम संस्कार भी किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां लेकर सुबह 7 बजे से 9 बजे तक शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
स्वयंसेवकों ने कहा कि शहर के विकास के नाम पर हरित क्षेत्र को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह पेड़ों की कटाई जारी रही तो शहर का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा, “जब कोई शहर अपने पेड़ खो देता है, तो वह धीरे-धीरे अपनी आत्मा भी खो देता है।” इस संदेश के माध्यम से उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से हरित क्षेत्र की रक्षा करने की अपील की।
आयोजकों ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने मांग की कि केबीआर पार्क और आसपास के क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और वैकल्पिक समाधान खोजे जाएं ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास और हरित क्षेत्र के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुरक्षित रह सके।
इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर हैदराबाद में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच चल रहे विवाद को चर्चा में ला दिया है।





