
x
Amravati अमरावती। गुंटूर की एक अदालत ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के सहयोगी पुडी श्रीहरि को मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े एक मामले में जमानत दे दी।
श्रीहरि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के महासचिव (मीडिया विभाग) और जगन मोहन रेड्डी के पूर्व मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हैं। श्रीहरि को गुरुवार देर रात फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। यह गिरफ्तारी कुप्पम शहर की एक अदालत से जमानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद हुई।
गुंटूर जिले के कोथापेटा से आई एक टीम ने उन्हें कुप्पम में गिरफ्तार किया और कोठापेटा पुलिस स्टेशन ले गई, जहां उन्हीं आरोपों पर उनके खिलाफ एक अलग एफआईआर दर्ज की गई। दो हफ्तों में यह तीसरी बार था जब श्रीहरि को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की इस कार्रवाई की वाईएसआरसीपी ने कड़ी निंदा की और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया।
गुंटूर के सरकारी अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया, जब पुलिस ने वाईएसआरसीपी के एमएसलसी लेल्ला अप्पिरेड्डी को श्रीहरि से मिलने से रोक दिया। श्रीहरि को अदालत में पेश किए जाने से पहले मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गया था।
गुंटूर कोर्ट ने बाद में श्रीहरि को जमानत दे दी, जो एक पत्रकार भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पत्रकारिता को एक 'संगठित अपराध' मान रही है। श्रीहरि ने कहा कि उन्होंने कभी पुलिस थाने या कोर्ट में कदम नहीं रखा, लेकिन उन्हें दो हफ्तों के अंदर ही कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है, इसलिए उन्हें किसी बात का डर नहीं है।
गुंटूर में वाईएसआरसीपी कार्यालय में पार्टी नेताओं के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए श्रीहरि ने पिछले दो हफ्तों में अपने खिलाफ हुई लगातार गिरफ्तारियों और दर्ज मामलों पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 साल के बेदाग करियर के बावजूद उनके साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मीडिया समन्वय के काम को एक 'आपराधिक गिरोह' के तौर पर दिखाना चिंताजनक है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ख़तरनाक भी।
वाईएसआरसीपी महासचिव पोन्नवोलु सुधाकर रेड्डी ने इस घटना को 'संवैधानिक मूल्यों और सत्ता के दुरुपयोग' के बीच की लड़ाई बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी व्यक्ति को एक ही कथित अपराध के लिए बार-बार गिरफ्तार कैसे किया जा सकता है?
उन्होंने कहा कि अदालतों ने कई बार पुलिस की रिमांड की मांग को खारिज किया है और असंवैधानिक कार्रवाइयों के खिलाफ दखल दिया है।
श्रीहरि को सबसे पहले 15 अप्रैल को विजयवाड़ा में गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ यह मामला मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की मॉर्फ की गई (बदली हुई) तस्वीरों वाले आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने के आरोप में दर्ज किया गया था।
इसके बाद उन्हें कुप्पम ले जाया गया, जहां उनके और वाईएसआरसीपी के एक अन्य पदाधिकारी गिरीश कुमार रेड्डी के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया था।
श्रीहरि को 16 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया गया। अदालत ने पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजने की मांग की गई थी। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी।
जब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, तो कुप्पम पुलिस ने 29 अप्रैल को बेंगलुरु में श्रीहरि को फिर से गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कुप्पम लाया गया, जहां 30 अप्रैल को उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया।
Tagsपुडी श्रीहरिचंद्रबाबू नायडूYSRCPसोशल मीडिया पोस्ट विवादआंध्र प्रदेश राजनीतिगुंटूर कोर्टबार-बार गिरफ्तारीराजनीतिक विवादजमानतविजयवाड़ा केसजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





