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hyderabad हैदराबाद: विमेंस इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (WICCI) होलिस्टिक चाइल्ड डेवलपमेंट काउंसिल ने गैर-सरकारी संस्था मरहम रेज़ोनेटिंग रेज़ीलिएंस (Marham Resonating Resilience) के साथ मिलकर हाल ही में एक विशेष डांस थैरेपी सेशन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटीज़ (NIEPID), बोवेनपल्ली, सिकंदराबाद में आयोजित किया गया।
इस अनोखे सेशन का शीर्षक ‘लैंड ऑफ हैप्पी’ रखा गया था। इसे प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना और कला विशेषज्ञ सोहिनी रॉयचौधरी ने संचालित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य
सेशन का उद्देश्य विशेष बच्चों और बौद्धिक दिव्यांग छात्रों के लिए सशक्तिकरण, समावेशन, भावनात्मक हीलिंग और आत्म-अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना था। डांस थैरेपी के माध्यम से बच्चों को अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिला, जिससे उनमें आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
डांस थैरेपी की विशेषताएं
बच्चों ने गतिविधि आधारित थेरेपी में भाग लिया।
डांस के जरिए छात्रों ने अपनी अभिव्यक्ति, खुशी और आत्म-संतुलन को महसूस किया।
थैरेपी का मुख्य फोकस था—इंक्लूज़न (समावेश), एक्सप्रेशन और हीलिंग।
आयोजकों के विचार
आयोजकों ने कहा कि डांस और संगीत केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि यह थेरेपी और मानसिक संतुलन का भी मजबूत माध्यम है। इस पहल के जरिए न केवल बच्चों को मानसिक मजबूती मिली, बल्कि उन्हें समाज में अपनी जगह और पहचान को बेहतर ढंग से समझने का मौका भी मिला।
सोहिनी रॉयचौधरी ने कहा, “डांस जीवन को जीने का एक तरीका है। यह बच्चों को उनकी सीमाओं से बाहर निकलने और स्वतंत्र रूप से खुद को व्यक्त करने में मदद करता है। यह सत्र मेरे लिए भी उतना ही विशेष था जितना बच्चों के लिए।”
संस्थानों की भूमिका
WICCI होलिस्टिक चाइल्ड डेवलपमेंट काउंसिल लगातार बच्चों के समग्र विकास के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है।
मरहम रेज़ोनेटिंग रेज़ीलिएंस एनजीओ समाज के कमजोर वर्गों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने पर काम करता है।
NIEPID विशेष रूप से बौद्धिक दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षण, शिक्षा और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने वाला प्रमुख संस्थान है।
छात्रों की प्रतिक्रिया
बच्चों ने इस सेशन को बेहद उत्साह से अपनाया। उन्होंने नृत्य के माध्यम से अपनी खुशी और ऊर्जा को व्यक्त किया। प्रशिक्षकों और आयोजकों ने बताया कि डांस थैरेपी का सीधा प्रभाव बच्चों के मूड, आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता पर देखा गया।
भविष्य की योजना
आयोजकों ने घोषणा की कि इस तरह के डांस थैरेपी सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को लगातार समर्थन मिल सके।
यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि कला और नृत्य केवल प्रदर्शन की विधा नहीं, बल्कि समाज में समावेशन और हीलिंग का एक प्रभावी माध्यम भी हैं।
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