तेलंगाना

तेलंगाना की मिट्टी की प्यास बुझाने की क्षमता कम होती जा रही

Subhi
18 Oct 2026 2:18 PM IST
तेलंगाना की मिट्टी की प्यास बुझाने की क्षमता कम होती जा रही
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हैदराबाद: तेलंगाना में 'अल नीनो' के कारण कृषि स्थितियों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ऐसे में मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित हो गया है। कृषि विभाग के परीक्षणों से पता चलता है कि अधिकांश जिलों की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन (जैविक कार्बन) की मात्रा मध्यम या कम है।

ऑर्गेनिक कार्बन मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है, सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा देता है और पोषक तत्वों के चक्र (न्यूट्रिएंट साइक्लिंग) में सुधार करता है। इसकी कमी से मिट्टी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और सूखे के दौरान फसलों के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। विभाग के ये निष्कर्ष बताते हैं कि मिट्टी के प्रबंधन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, खासकर तब जब किसान मौसम से जुड़े जोखिमों का सामना कर रहे हैं।

केंद्र और राज्य की एक संयुक्त पहल के तहत, कृषि विभाग ने लगभग दो लाख मिट्टी के परीक्षण किए हैं, जिसमें केंद्र सरकार ने 60% फंड दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 621 मंडलों में से, 2024-25 और 2025-26 के दौरान हर एक मंडल में परीक्षण किए गए। 2026-27 के लिए परीक्षण का काम चल रहा है। 2019-20 में बंद होने के बाद, यह प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है।

परीक्षण के नतीजों से पता चलता है कि केवल 14% मिट्टी में ही ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा अधिक है। कई जिलों की मिट्टी में नाइट्रोजन की भी कमी है, जबकि लगभग 20% मिट्टी में फास्फोरस और पोटेशियम का स्तर कम पाया गया है।

ये नतीजे काफी हद तक राष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप हैं। 'इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस' (ICRIER) के एक अध्ययन में, जो 2024-25 के 'सॉइल हेल्थ कार्ड' (मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड) के आकलन पर आधारित है, पाया गया कि भारत की केवल 25% मिट्टी में ही पर्याप्त मात्रा में ऑर्गेनिक कार्बन मौजूद है।

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