तेलंगाना

एर्रावल्ली के किसान अपनी ज़मीन लिए जाने के बदले मुआवज़े की मांग कर रहे

Subhi
24 Sept 2026 12:03 PM IST
एर्रावल्ली के किसान अपनी ज़मीन लिए जाने के बदले मुआवज़े की मांग कर रहे
x

सिद्दिपेट: सिद्दिपेट ज़िले के मारकूक मंडल के एर्रावल्ली गाँव में, पिछली BRS सरकार के समय पांडवुल चेरुवु को सुंदर बनाने और एक मिनी टैंक बंड (छोटा बाँध) बनाने के लिए एर्रावल्ली के किसानों की ज़मीनें ले ली गई थीं। अब वे मांग कर रहे हैं कि उन्हें इसके बदले दूसरी ज़मीन दी जाए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टैंक बंड बनाने के लिए ज़रूरी मिट्टी खोदने और उसे ले जाने की वजह से उनकी बची-खुची ज़मीन भी बर्बाद हो गई।

यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि पिछले एक हफ़्ते से अधिकारी गाँव में सर्वे नंबर 325 में सरकारी ज़मीनों का सर्वे कर रहे हैं। कई स्थानीय किसान शिकायत कर रहे हैं कि BRS सरकार के समय 'धरणी पोर्टल' शुरू होने के बाद से उनकी ज़मीन की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है।

हालाँकि अधिकारी पिछले कुछ दिनों से सर्वे कर रहे हैं, लेकिन किसान शिकायत कर रहे हैं कि पिछली सरकार ने पांडवुल चेरुवु बनाने के लिए उनकी ज़मीनें तो ले लीं, लेकिन न तो उन्हें कोई दूसरी ज़मीन दी और न ही कोई मुआवज़ा दिया।

एक बुज़ुर्ग महिला, पारानी नागाम्मा ने कहा कि गाँव में उनके पास एक एकड़ और उनके पति के पास आधा एकड़ ज़मीन थी, लेकिन उनकी ज़मीन से मिट्टी खोद ली गई, जिससे वह बेकार हो गई।

उन्होंने कहा, "रातों-रात मेरी ज़मीन से मिट्टी खोदकर पांडवुल चेरुवु बंड बनाने के लिए ले जाई गई। अब हम बिना किसी रोज़गार के मुश्किल में हैं।"

एक और ग्रामीण, के. अंडालू ने अपनी परेशानी ज़ाहिर करते हुए कहा कि अधिकारियों ने उनके परिवार की आठ एकड़ ज़मीन ले ली, लेकिन आज तक उन्हें एक एकड़ भी दूसरी ज़मीन नहीं दी और न ही कोई दूसरा मुआवज़ा दिया।

उन्होंने आगे कहा, "हमने कई बार KCR (जब वे मुख्यमंत्री थे) से संपर्क किया। उन्होंने इस समस्या को हल करने का वादा किया था, लेकिन कभी उस वादे को पूरा नहीं किया।"

चूँकि मौजूदा सरकार सर्वे कर रही है, इसलिए जिनकी ज़मीनें चली गई हैं, वे सरकार से दूसरी ज़मीन देने की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि "मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने एर्रावल्ली की ज़मीनों के सर्वे की घोषणा की थी और हर परिवार को आधा एकड़ ज़मीन देने का वादा किया था।" साथ ही, उन्होंने मांग की कि उन्हें उतनी ही ज़मीन दी जाए जितनी उनके मालिकाना हक़ वाले दस्तावेज़ों में दर्ज है।

Next Story