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Hyderabad हैदराबाद। पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन (Mohammed Azharuddin) को अचानक राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के फैसले ने तेलंगाना की सियासत में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के भीतर भी इस फैसले से असंतोष की लहर देखी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ (Mahesh Kumar Goud) समेत कई वरिष्ठ नेताओं को इस फैसले की जानकारी पहले से नहीं थी। बुधवार को मीडिया से बातचीत में TPCC प्रमुख गौड़ ने स्वीकार किया कि उन्हें अजहरुद्दीन के कैबिनेट में शामिल होने की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनका यह बयान कांग्रेस के अंदर बढ़ती नाराजगी और परामर्श की कमी को उजागर करता है। कई वरिष्ठ नेताओं ने इस बात पर असहमति जताई है कि पार्टी के अंदर बड़े फैसले अब कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कई नेताओं को इस बात पर भी आपत्ति है कि अजहरुद्दीन को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला जुबली हिल्स उपचुनाव (Jubilee Hills By-election) से ठीक पहले लिया गया, जिससे यह संदेश गया कि पार्टी किसी विशेष समुदाय को लुभाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, गुरुवार को स्थिति को संभालते हुए महेश कुमार गौड़ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने BRS और BJP पर अजहरुद्दीन की नियुक्ति का विरोध करने का आरोप लगाया। गौड़ ने कहा, “यह साफ दिखाता है कि दोनों पार्टियों में अंदरूनी गठजोड़ (nexus) है। जब भी कांग्रेस कोई बड़ा कदम उठाती है, वे मिलकर उसका विरोध करते हैं।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा (Governor Jishnu Dev Varma) पर दबाव बनाया जा रहा है। गौड़ ने बताया कि मंत्रिमंडल पहले ही मोहम्मद अजहरुद्दीन और तेलंगाना जन समिति (TJS) के अध्यक्ष प्रो. कोदंडाराम रेड्डी (Prof. Kodandaram Reddy) को विधान परिषद सदस्य (MLC) के रूप में नामित कर चुका है, लेकिन राज्यपाल की मंजूरी अभी तक लंबित है। TPCC प्रमुख ने यह भी कहा कि कैबिनेट के दो अन्य रिक्त पदों को लेकर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (A. Revanth Reddy) दिसंबर में निर्णय लेंगे। उन्होंने इस बात को खारिज किया कि वे उपमुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। गौड़ ने स्पष्ट कहा, “मैं TPCC अध्यक्ष के पद से पूरी तरह संतुष्ट हूं। यह किसी अन्य पद से बड़ा और जिम्मेदारी भरा पद है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस द्वारा अजहरुद्दीन को शामिल करने का निर्णय न केवल क्रिकेटर की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश है, बल्कि मुस्लिम समुदाय में पार्टी की पकड़ मजबूत करने का भी प्रयास है। वहीं, विपक्ष इस कदम को “चुनावी रणनीति” करार दे रहा है। अब सबकी निगाहें राज्यपाल की मंजूरी पर टिकी हैं, जिसके बाद अजहरुद्दीन और प्रो. कोदंडाराम रेड्डी का राज्यसभा में औपचारिक प्रवेश तय होगा।
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