तेलंगाना

Dubbak में “प्रजा पालना” कार्यक्रम के दौरान विधायक का विरोध, धान खरीद में देरी पर उठाए सवाल

Harrison
2 May 2026 9:38 PM IST
Dubbak में “प्रजा पालना” कार्यक्रम के दौरान विधायक का विरोध, धान खरीद में देरी पर उठाए सवाल
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Siddipet सिद्दिपेट: तेलंगाना के दुब्बक में शनिवार को आयोजित “प्रजा पालना” कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक माहौल उस समय बदल गया जब दुब्बक के विधायक कोथा प्रभाकर रेड्डी ने किसानों की समस्याओं को लेकर विरोध दर्ज कराया।
कार्यक्रम के दौरान विधायक कोथा प्रभाकर रेड्डी जमीन पर बैठ गए और किसानों से धान तथा अन्य अनाज की खरीद में हो रही देरी के खिलाफ अपना विरोध जताया। उनका यह कदम कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
विधायक ने कहा कि जब किसान अपनी फसल बेचने के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं और अनाज खरीद प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है, तब सरकार का इस तरह के कार्यक्रमों और आयोजनों पर ध्यान देना सही नहीं है। उन्होंने इसे किसानों की समस्याओं की अनदेखी बताया।
उन्होंने सीधे तौर पर राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धान खरीद में देरी के कारण किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कई किसान अपनी उपज को समय पर नहीं बेच पा रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति और कठिन हो रही है।
विधायक ने यह भी कहा कि किसान पहले से ही मौसम और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और अगर खरीद प्रक्रिया में भी देरी होगी तो उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी। उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।
इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने भी किसानों की समस्याओं पर चिंता जताई। कई किसानों ने बताया कि वे कई दिनों से धान खरीद केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर भुगतान और खरीद की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
विधायक के इस विरोध ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए और खरीद प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना चाहिए।
वहीं, समर्थकों का मानना है कि विधायक ने किसानों की आवाज को सही तरीके से उठाया है और उनका यह कदम जमीनी हकीकत को सामने लाता है।
कुल मिलाकर, दुब्बक में आयोजित “प्रजा पालना” कार्यक्रम के दौरान विधायक कोथा प्रभाकर रेड्डी का विरोध किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। धान खरीद में देरी का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।
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