
हैदराबाद: मंगलवार को गोपालपुरम पुलिस ने BRS प्रवक्ता मन्ने कृष्णंक को गिरफ़्तार किया। यह गिरफ़्तारी कांग्रेस नेता मेट्टू साई कुमार की शिकायत पर की गई, जिसमें मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के परिवार के सदस्यों से जुड़े बिज़नेस हितों के बारे में आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने बताया कि उन्हें न्यायिक रिमांड के लिए सिकंदराबाद की अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें ज़मानत मिल गई।
सोमवार रात दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर, साइबर क्राइम पुलिस ने कृष्णंक के ख़िलाफ़ BNS की धाराओं 353(2) और 352 के तहत FIR दर्ज की। उन पर शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान करने, अफ़वाहें फैलाने और सोशल मीडिया के ज़रिए नफ़रत फैलाने का आरोप है। DCP (क्राइम और डिटेक्टिव डिपार्टमेंट) एस. चैतन्य कुमार को दी गई शिकायत में, साई कुमार ने कृष्णंक के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की मांग की थी। आरोप था कि कृष्णंक ने मुख्यमंत्री की बेटी पर प्रॉपर्टी और फ़ार्मा कंपनियों की कथित ओनरशिप को लेकर झूठे आरोप लगाए थे।
पुलिस ने पाया कि कृष्णंक ने जुड़वां शहरों में कई जगहों पर फ़्लेक्स लगाए थे और मुख्यमंत्री व उनके परिवार के ख़िलाफ़ झूठे आरोप फैलाए थे या उनका प्रचार किया था। एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने यह पाया कि कृष्णंक के आरोपों के समर्थन में कोई सबूत या परिस्थितिजन्य आधार नहीं था, जिसके बाद कार्रवाई की गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "अगर आरोप झूठे, मनगढ़ंत, गुमराह करने वाले, मानहानि करने वाले या बिना सबूत के हैं, तो इसका मतलब है कि उन्होंने झूठी जानकारी बनाई और फैलाई है।"
कृष्णंक ने 3 अक्टूबर को BRS मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े कथित बिज़नेस हितों, संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की थी।
इससे पहले, मंगलवार को तेलंगाना हाई कोर्ट ने शहर की पुलिस को निर्देश दिया कि वे कृष्णंक की गिरफ़्तारी की आशंका से निपटने के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई उचित प्रक्रिया और गाइडलाइंस का पालन करें। जस्टिस टी. माधवी देवी ने कृष्णंक की 'लंच मोशन' रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हैदराबाद के DCP (क्राइम) को निर्देश दिया कि वे उन्हें BNSS, 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करें और प्रक्रिया का पालन करें। अदालत ने कृष्णंक को भी जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। कृष्णंक के वकील टी.वी. रमना राव ने दलील दी कि FIR बिना किसी शुरुआती जांच के दर्ज की गई थी और पुलिसकर्मी उनका पीछा कर रहे थे और उन्हें गिरफ़्तारी की धमकी दे रहे थे। गृह विभाग के सरकारी वकील महेश राजे ने बताया कि FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी थी।





