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Warangal वारंगल: पुराने वारंगल जिले में इस साल धान और मक्के की अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसानों को अपनी फसल बेचने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य वजह यह है कि कई खरीद केंद्र या तो अभी तक शुरू नहीं हुए हैं या फिर अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर रहे हैं। इसके कारण बड़ी मात्रा में अनाज खुले में पड़ा हुआ है, जो तेज गर्मी और संभावित बारिश के कारण खराब होने के खतरे में है।
किसानों के अनुसार सबसे अधिक समस्या मक्का उत्पादकों को हो रही है। 2025-26 सीजन में वारंगल क्षेत्र में लगभग 46,000 एकड़ में मक्का की खेती की गई थी, जिससे अनुमानित 1.38 लाख क्विंटल उत्पादन हुआ है। लेकिन खरीद व्यवस्था सीमित होने के कारण किसान अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं बेच पा रहे हैं।
स्थिति का सीधा असर बाजार कीमतों पर भी पड़ा है। जहां मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है, वहीं खुले बाजार में इसकी कीमत गिरकर 1,600 से 1,900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इस गिरावट के कारण किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 900 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। एक एकड़ में मक्का की खेती पर लगभग 40,000 रुपये तक का खर्च आ रहा है। ऐसे में जब उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, तो उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो रही है।
किसानों का कहना है कि अगर खरीद केंद्र समय पर और पूरी क्षमता से काम करते, तो उन्हें अपनी फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलता और नुकसान से बचा जा सकता था। लेकिन मौजूदा स्थिति में उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है या फिर उसे खुले में रखना पड़ रहा है, जिससे गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
कई किसानों ने यह भी चिंता जताई है कि खुले में रखी गई फसल अगर बारिश की चपेट में आती है तो उन्हें और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। धान और मक्का दोनों की फसलें ऐसे हालात में खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि खरीद केंद्रों को तुरंत सक्रिय किया जाए और पर्याप्त संख्या में केंद्र खोले जाएं ताकि सभी किसानों की उपज खरीदी जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि खरीद प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर खरीद व्यवस्था सुचारू रूप से काम करे तो किसानों को बाजार में कीमत गिरने के कारण होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके अलावा, फसल भंडारण की उचित व्यवस्था भी जरूरी है ताकि अनाज की गुणवत्ता बनी रहे।
वारंगल में मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर कृषि विपणन प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है, जहां उत्पादन अच्छा होने के बावजूद किसानों को उसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही प्रशासन इस समस्या पर ध्यान देगा और खरीद केंद्रों को प्रभावी रूप से चालू करेगा।
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