
HYDERABAD हैदराबाद: तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में शौचालयों की कमी या खराब स्थिति के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं स्कूल समय के दौरान पानी पीने से बच रही हैं। इससे उनमें स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जैसे निर्जलीकरण, मूत्र संबंधी संक्रमण और पाचन समस्याएं। छात्राओं के इस व्यवहार का मुख्य कारण स्कूलों में पर्याप्त और कार्यात्मक शौचालयों की अनुपलब्धता है। कई स्कूलों में तो शौचालय मौजूद हैं, लेकिन उनकी स्थिति इतनी खराब है कि छात्राएं उनका इस्तेमाल करने में असहज महसूस करती हैं। इस स्थिति ने छात्राओं की दैनिक दिनचर्या और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाला है।
हाल ही में शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) प्लस के आंकड़े 2024-25 के लिए सरकारी स्कूलों की बुनियादी ढांचे की स्थिति को दर्शाते हैं। रिपोर्ट में स्कूलों में शौचालयों, स्वच्छ पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी को उजागर किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल और स्वच्छता की सुविधाओं की कमी न केवल स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देती है, बल्कि लड़कियों के शिक्षा में नियमित भागीदारी को भी प्रभावित करती है। छात्राओं का स्कूल आने का उत्साह कम होता है और पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि सभी स्कूलों में कार्यात्मक और स्वच्छ शौचालयों का निर्माण, पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था और स्वच्छता शिक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अलावा, छात्राओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए नियमित निगरानी और सुधार योजनाएं लागू करनी चाहिए। UDISE प्लस की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी केवल छात्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों के समग्र शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित कर रही है। यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो छात्राओं की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए तेलंगाना सरकार और संबंधित विभागों को स्कूलों में पानी और स्वच्छता की पर्याप्त सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है। छात्राओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के हित में यह एक महत्वपूर्ण और प्राथमिक जिम्मेदारी है।





