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Hyderabad, Telangana. हैदराबाद, तेलंगाना। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (KTR) ने तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी पर वोट चोरी और चुनावी गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने बूथ स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में 23,000 से अधिक वोट जोड़कर चुनाव प्रक्रिया में धांधली की है। KTR ने मीडिया को बताया कि कांग्रेस के उम्मीदवार नवीन कुमार यादव के छोटे भाई, प्रवीण कुमार यादव के नाम पर केवल तीन वोट होने चाहिए थे – दो ज्यूबली हिल्स और एक राजेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र में। इसके बावजूद, निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जांच करने पर कई अवैध और डुप्लिकेट वोट पाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “यह सब सार्वजनिक जानकारी में उपलब्ध है। आप खुद जाकर निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जाकर यह जानकारी जांच सकते हैं।
बीआरएस नेता ने तीन मुख्य मांगें उठाई हैं। पहला, निर्वाचन आयोग से पूरे 23,000 अतिरिक्त वोटों की पूरी तरह से जांच कराने की। दूसरा, इन सभी अवैध और डुप्लिकेट वोटों को रद्द करने की। और तीसरा, उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जो कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर चुनावी गड़बड़ी में शामिल रहे। KTR ने कहा कि यह गड़बड़ी लोकतंत्र और मतदाता के अधिकारों के खिलाफ है, और यदि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होना है तो इन अवैध वोटों को तुरंत हटाया जाना चाहिए। KTR ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी निर्वाचन प्रक्रिया में हेरफेर और भ्रष्टाचार कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह “कांग्रेस की जीत पाने के लिए की जाने वाली निराशा और हठधर्मिता” नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बूथ स्तर के अधिकारियों और कांग्रेस के नेताओं के बीच मिलीभगत के कारण ही यह गड़बड़ी संभव हो पाई है।
बीआरएस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल पार्टी के हित का नहीं है, बल्कि जनादेश और लोकतांत्रिक प्रणाली की सुरक्षा का मामला है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपील की कि वे सभी कानूनी और संवैधानिक कदम उठाएं, ताकि तेलंगाना में होने वाले चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आरोप राजनीतिक तनाव और चुनावी रणनीति के बीच उठे हैं। हालांकि, KTR ने जोर देकर कहा कि साक्ष्य सार्वजनिक हैं और जांच की मांग लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी गड़बड़ी सही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होना चाहिए। तेलंगाना के विधानसभा चुनाव को लेकर यह आरोप चुनावी माहौल को और गर्मा सकते हैं। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच वोटिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच निर्वाचन आयोग की भूमिका भी सुर्खियों में है। KTR की इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद अब सभी की नजरें आयोग की कार्रवाई पर हैं। इस मामले में यह स्पष्ट है कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी दोनों पर सवाल उठे हैं, और बीआरएस के दबाव के चलते आयोग की तुरंत जांच और कार्रवाई अपेक्षित है।
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