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Hyderabad हैदराबाद। खेल जगत में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार करने वाले सेपक टकरॉ (Sepak Takraw) कोच धनराज कोयलकर (Dhanraj Koyalkar) आज खुद आर्थिक तंगी और गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। 55 वर्षीय धनराज फिलहाल शहर के एक निजी अस्पताल में पिछले कई हफ्तों से भर्ती हैं, जहां वे किडनी फेल्योर और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर की गंभीर स्थिति में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। धनराज कोयलकर ने लगभग 25 वर्षों तक तेलंगाना राज्य खेल प्राधिकरण (Sports Authority of Telangana) में बतौर अनुबंधित कोच काम किया और एलबी स्टेडियम व हकीमपेट स्थित स्पोर्ट्स स्कूल में सैकड़ों खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया। उन्हीं की कोचिंग में देश को ए. तरंगिनी, आर. नवथा और एन. मधु जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मिले, जिन्होंने राष्ट्रीय और एशियाई स्तर पर पदक जीतकर तेलंगाना का नाम रोशन किया।
लेकिन आज वही कोच जो दूसरों को ऊंचाइयों पर पहुंचाने का सपना दिखाता था, खुद के इलाज के लिए पैसों की कमी से जूझ रहा है। डॉक्टरों ने धनराज को क्रॉनिक किडनी डिजीज के साथ-साथ कई अंगों के फेल होने की पुष्टि की है। उनकी स्थिति इतनी नाजुक है कि उन्हें आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। परिवार के मुताबिक, इलाज पर अब तक करीब 7 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और आगे के उपचार के लिए कम से कम 25 लाख रुपये की जरूरत है। परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और बेटी हैं, जो उम्र में इतने छोटे हैं कि किसी नौकरी या आर्थिक सहयोग की स्थिति में नहीं हैं।
धनराज के शिष्यों और खेल प्रेमियों ने क्राउड फंडिंग और निजी दान के जरिये चंदा इकट्ठा करने की कोशिश शुरू की है, ताकि कोच का इलाज जारी रह सके। उनके कई पुराने खिलाड़ी, जो आज राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं, ने भी मदद की अपील की है। धनराज की स्थिति की जानकारी मिलने पर तेलंगाना के खेल मंत्री वी. श्रीहरी ने खेल प्रशासन को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि “संवेदनशीलता के साथ कोच को वित्तीय मदद पर विचार किया जाए।” हालांकि अभी तक किसी औपचारिक आर्थिक सहायता का निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
धनराज के करीबी सहयोगियों का कहना है, “उन्होंने पूरी जिंदगी खेल को समर्पित की। राज्य को कई चैंपियन दिए, लेकिन अब जब उन्हें जरूरत है, तो व्यवस्था की बेरुखी साफ दिख रही है। यह सिर्फ एक कोच की नहीं, बल्कि पूरे खेल तंत्र की हकीकत है कि अनुबंधित प्रशिक्षकों को सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिलतीं। खेल जगत में धनराज की हालत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या राज्य उन प्रशिक्षकों का साथ देगा जिन्होंने तेलंगाना की खेल प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया? क्या व्यवस्था उन कोचों के प्रति संवेदनशील होगी, जिन्होंने अपनी जिंदगी खेल के मैदानों में बिता दी फिलहाल धनराज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं, जबकि उनके शिष्य और परिवारजन सरकार और समाज से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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