
हैदराबाद: तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने मंगलवार को भारत की समृद्ध आयुर्वेदिक विरासत की रक्षा करने और वैज्ञानिक अनुसंधान को अधिक महत्व देने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानव जीवन में स्वास्थ्य ही सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
वे केरल के कनकूर स्थित श्री धन्वंतरि मंदिर में आयोजित 'धन्वंतरि महायज्ञ' में स्वास्थ्य सुरक्षा, आयुर्वेद के महत्व, जन स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी के विषयों पर बोल रहे थे।
भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी का न होना नहीं है। शारीरिक तंदुरुस्ती, मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और एक संतोषजनक जीवन भी अच्छे स्वास्थ्य के उतने ही महत्वपूर्ण पहलू हैं।
उन्होंने सभी से आग्रह किया कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली से जुड़े बढ़ते तनाव का सामना करने के लिए वे अपने स्वास्थ्य और भलाई पर अधिक ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि धनतेरस को केवल सोना खरीदने के शुभ अवसर के रूप में ही नहीं, बल्कि 'धन्वंतरि जयंती' के रूप में इसके वास्तविक महत्व के साथ देखा जाना चाहिए।
हिंदू परंपरा के अनुसार, भगवान धन्वंतरि - जिन्हें दिव्य चिकित्सक माना जाता है - समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे स्वास्थ्य, उपचार और जीवन के संरक्षण के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान धन्वंतरि की पूजा करना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य, बल्कि परिवार और समाज की भलाई के प्रति भी एक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आयुर्वेद में केरल का एक विशिष्ट स्थान है
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की चिकित्सा विरासत में आयुर्वेद का एक विशेष स्थान है। केरल ने औषधीय पौधों के पारंपरिक ज्ञान और विशेष उपचार पद्धतियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय 'धन्वंतरि महायज्ञ' स्वास्थ्य के महत्व और भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की समृद्धि को उजागर करने में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में न केवल बीमारियों के इलाज पर, बल्कि बीमारियों की रोकथाम, संतुलित जीवनशैली, उचित पोषण और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने पर भी जोर दिया गया है।
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद का अभ्यास जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और मरीजों को सुरक्षित चिकित्सा देखभाल का भरोसा मिलना चाहिए।
विकास में जन स्वास्थ्य प्राथमिकता होनी चाहिए
भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि विकास नीतियों के केंद्र में जन स्वास्थ्य और लोगों का कल्याण होना चाहिए। उन्होंने अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, बीमारी की रोकथाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने समाज से अपील की कि वे बीमारियों से जूझ रहे लोगों और उन परिवारों की मदद करें जो इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और समाज के कमजोर वर्गों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करने के महत्व पर भी जोर दिया।
उप मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के योगदान की सराहना की, जो लोगों की जान बचाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास करते हैं।
मन्नाथु पद्मनाभन, श्री नारायण गुरु और अय्यंकाली जैसे समाज सुधारकों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इन लोगों ने ज्ञान का प्रसार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया कि हर कोई सम्मान और आत्म-सम्मान के साथ जी सके। उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी द्वारा की गई पहलों की भी सराहना की।
उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, नवाचार को बढ़ावा दें और कुछ नया जानने की जिज्ञासा विकसित करें।
स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए, भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों की भलाई के लिए जंगलों, औषधीय पौधों, स्वच्छ जल स्रोतों और जैव विविधता की रक्षा करना बहुत जरूरी है।
उन्होंने पूरे देश में शांति, समाज में सद्भाव और हर परिवार में स्वास्थ्य व खुशहाली की कामना की।
उप मुख्यमंत्री ने 'धन्वंतरि महा यज्ञ' के आयोजकों, मंदिर प्रशासन, स्वयंसेवकों और इस अवसर पर एकत्रित हुए भक्तों को मलयालम भाषा में शुभकामनाएं दीं।





