
हैदराबाद: स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को JOSH (स्वास्थ्य के लिए संयुक्त टीम) टीमें शुरू कीं। इनका मकसद टीबी (TB) खत्म करने के प्रोग्राम में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना और स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान और इलाज में मदद के लिए समुदाय की भागीदारी को बढ़ाना है। यह पहल केंद्र सरकार के 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत लागू की जा रही है। JOSH टीमें ब्लॉक या वार्ड लेवल पर बनाई जाएंगी; हर टीम में क्लास-I नोडल ऑफिसर की देखरेख में पांच 'MY भारत' वॉलंटियर और पांच NCC कैडेट होंगे।
ये टीमें टीबी के बारे में जागरूकता फैलाने, समुदायों को एकजुट करने, संदिग्ध मामलों की स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान में मदद करने और मरीज़ों को अपना इलाज पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करने पर ध्यान देंगी। हैदराबाद ज़िले की टीम ने राज्य की टीम के साथ मिलकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड फ़ैमिली वेलफ़ेयर से वर्चुअल तरीके से इसमें हिस्सा लिया।
स्वास्थ्य कमिश्नर डॉ. संगीता सत्यनारायण ने वॉलंटियर्स से टीबी के बारे में जागरूकता फैलाने और मरीज़ों को सलाह देने को कहा ताकि वे तय इलाज पूरा कर सकें। राज्य टीबी अधिकारी डॉ. ए. राजेशम ने प्रतिभागियों से कहा कि वे टीबी के मामलों की स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान में नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) के साथ मिलकर काम करें।
राज्य टीबी और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर (STDC) की डायरेक्टर डॉ. राजेश्वरी ने टीबी का इलाज करा रहे लोगों के लिए सामुदायिक और मनोवैज्ञानिक-सामाजिक सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। हैदराबाद ज़िले के मेडिकल और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुतला श्रीनिवास ने कमज़ोर वर्गों के बीच स्क्रीनिंग बढ़ाने और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल की बात कही। हैदराबाद ज़िले के टीबी कंट्रोल ऑफिसर डॉ. जी. यदागिरी ने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए विभागों के बीच तालमेल और समुदाय की भागीदारी ज़रूरी है।





