
हैदराबाद: जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी हैदराबाद (JNTUH) के दस छात्रों ने आरोप लगाया है कि तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ जारी अनुशासनात्मक सर्कुलर पर रोक लगाने के बावजूद, यूनिवर्सिटी प्रशासन उन्हें क्लास में जाने और हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं दे रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव योगिता राणा और तेलंगाना राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. वी. बालकिस्ता रेड्डी को लिखे एक पत्र में, छात्रों ने बताया कि वे पिछले 55 दिनों से प्राइवेट हॉस्टल में रह रहे हैं और अपने खर्च खुद उठा रहे हैं, जबकि वे क्लास में भी नहीं जा पा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हम क्लास में जाने से रोके जाने के बावजूद, प्राइवेट आवास पर हजारों रुपये खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं।" उन्होंने अधिकारियों से इस मामले में दखल देने की अपील की।
छात्रों ने बताया कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने एक साथी छात्र द्वारा एक छात्रा को परेशान करने (उत्पीड़न) पर आपत्ति जताई।
"JNTU के छात्र होने के नाते, हमने यह कहने की कोशिश की कि हमारी साथी छात्राओं को परेशान करना गलत है।"
एक छात्र ने 'डेक्कन क्रॉनिकल' को बताया, "कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए एक छोटी सी बहस को बड़ा बना दिया और आम छात्रों को भड़का दिया, जिससे यूनिवर्सिटी कैंपस में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।"
उन्होंने यूनिवर्सिटी की जांच समिति पर चुनिंदा लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
उनके अनुसार, JNTUH के प्रिंसिपल प्रो. नरसिम्हा रेड्डी ने 13 अक्टूबर को आदेश जारी कर उनमें से कुछ छात्रों को 6 से 8 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया और उन्हें हॉस्टल में रहने से रोक दिया।
छात्रों ने कहा कि उन्होंने "कई बार यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली।"
एक छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने उनसे मिलने से ही इनकार कर दिया और जब उन्होंने मदद मांगी, तो उनका मजाक उड़ाया गया।
उन्होंने एक ऐसी घटना का जिक्र किया, जिसमें वे रजिस्ट्रार के पास गए और उन्हें बताया कि उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।
छात्रों का आरोप है कि रजिस्ट्रार ने कहा, "बहुत बढ़िया, मैं आपके प्रिंसिपल की तारीफ करता हूं।"
दो छात्रों की परीक्षा छूट जाने के बाद, उन्होंने वकील रेवंत करुपोथुला और कृष्णा मरागनी के जरिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एक रिट याचिका पर अंतरिम आदेश देते हुए, अदालत ने 13 अक्टूबर के उस अनुशासनात्मक सर्कुलर पर 15 दिसंबर तक रोक लगा दी, जिसका संबंध इन 10 याचिकाकर्ताओं से था।
अदालत ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह इन छात्रों को उनके चल रहे और बाकी सेमेस्टर की परीक्षाएं देने की अनुमति दे। साथ ही, जिन दो छात्रों की 26 अक्टूबर को 'इंटरनेशनल बिजनेस' विषय की परीक्षा छूट गई थी, उनके लिए एक और परीक्षा आयोजित करने को कहा।
छात्रों ने बताया कि अदालत ने सजा में अंतर और जांच समिति द्वारा इस घटना को संभालने के तरीके पर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंतरिम आदेश के बावजूद, विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वारों पर छात्रों की तस्वीरें लगाई गई थीं।
विश्वविद्यालय के बर्ताव पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा, "जिन छात्रों को हॉस्टल में जगह नहीं मिलती, उन्हें 'नॉन-हॉस्टलर' कहा जा सकता है, लेकिन छात्रों को 'नॉन-बोर्डर्स' कैसे कहा जा सकता है?"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अदालत का दरवाजा खटखटाने के कारण उन्हें धमकियां दी गईं। उन्होंने बताया कि इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा अधिकारियों को ईमेल भी भेजा है।
इस मुद्दे पर पूछे जाने पर, JNTU के एक अधिकारी ने 'डेक्कन क्रॉनिकल' को बताया कि अदालत की ओर से मिली अंतरिम राहत केवल परीक्षाओं से जुड़ी है; इसमें हॉस्टल की सुविधा बहाल करने या कक्षाओं में प्रवेश देने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया है।





