तेलंगाना

अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किए बिना फिर से भर्ती प्रक्रिया करना अवैध

SHIDDHANT
28 Aug 2025 9:50 PM IST
अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किए बिना फिर से भर्ती प्रक्रिया करना अवैध
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HYDERABAD हैदराबाद (तेलंगाना): तेलंगाना हाईकोर्ट के न्यायाधीश नागेश भेमापाका ने आदेश दिया है कि सरकार के लिए यह अवैध है कि वे स्वीकृत पदों को खाली रखकर दशकों तक अनुबंध कर्मचारियों को काम पर रखें और फिर उन्हें उसी पद के लिए नई भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर करें।
मामला और पृष्ठभूमि
2013 में तत्कालीन सरकार ने 265 आईसीडीएस सुपरवाइजर ग्रेड-II पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना में पहले से कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों को 15 प्रतिशत वेटेज देने का प्रावधान था। इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए लगभग 200 आईसीडीएस अनुबंध कर्मचारी, जिनमें आंगनवाड़ी शिक्षक मीराबाई भी शामिल थीं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
कर्मचारियों का तर्क था कि उन्होंने छह से पंद्रह वर्षों तक सेवा दी है, ऐसे में उन्हें बिना नियमित किए फिर से भर्ती परीक्षा में शामिल करना अनुचित है। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उनकी सेवा और अनुभव को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है।
हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा लंबे समय तक अनुबंध कर्मचारियों को काम पर रखना और फिर उन्हें सामान्य भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर करना कानून के खिलाफ है। न्यायालय ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा और अनुभव को सम्मान दिया जाना चाहिए और उन्हें अनावश्यक रूप से पुनः प्रतिस्पर्धा के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
कर्मचारियों के अधिकार
हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार, अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया जाना चाहिए या उनके अनुभव और सेवा को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह निर्णय अन्य अनुबंध कर्मचारियों के लिए भी मिसाल के रूप में काम करेगा, जो लंबे समय तक सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
इस फैसले से न केवल आईसीडीएस कर्मचारियों को न्याय मिलेगा, बल्कि यह सरकार की भर्ती और कर्मचारियों की नियमितिकरण नीति में भी बदलाव का संकेत है। उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की लंबी सेवा और अनुभव का सम्मान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
भविष्य की कार्यवाही
सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुबंध कर्मचारियों को उनकी सेवा के अनुसार उचित अधिकार और प्राथमिकता मिले। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कर्मचारियों के अनुभव का सही मूल्यांकन किया जाएगा। इस निर्णय से तेलंगाना में अनुबंध कर्मचारियों की लंबी सेवा को लेकर मामलों में भी दिशा मिलेगी।
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