तेलंगाना

POCSO मामले में बंदी भागीरथ को अंतरिम ज़मानत, परीक्षा में शामिल होने के लिए कोर्ट का आदेश

Kavita2
20 Jun 2026 4:51 PM IST
POCSO मामले में बंदी भागीरथ को अंतरिम ज़मानत, परीक्षा में शामिल होने के लिए कोर्ट का आदेश
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Telangana तेलंगाना: मल्काजगिरी कोर्ट ने POCSO मामले में गिरफ्तार बंदी भागीरथ को अंतरिम ज़मानत प्रदान की है। यह ज़मानत उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने के उद्देश्य से दी गई है। आरोपी को पिछले महीने पेटबशीरबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था।

मल्काजगिरी कोर्ट ने यह आदेश मामले की परिस्थितियों और आरोपी द्वारा परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता को देखते हुए पारित किया। कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम ज़मानत मंजूर की है, जिसके तहत वह निर्धारित अवधि के लिए हिरासत से बाहर रहेंगे।

यह मामला पेटबशीरबाद पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, यह केस पिछले महीने पीड़िता की माँ की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार पीड़िता का यौन शोषण किया।

मामला दर्ज होने के बाद बंदी भागीरथ कुछ समय तक फरार रहे और लगभग एक सप्ताह से अधिक समय तक पुलिस की गिरफ्त से बचते रहे। बाद में पुलिस ने 16 मई को उन्हें गिरफ्तार किया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन है।

पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, यह मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। इस कानून के तहत नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में सख्त प्रावधान लागू होते हैं और मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में की जाती है।

हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल आरोपी को केवल अस्थायी राहत प्रदान की है, जो विशेष रूप से उनकी परीक्षा में भागीदारी को ध्यान में रखते हुए दी गई है। अंतरिम ज़मानत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें दोबारा न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।

POCSO Act के तहत दर्ज इस मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी और पुलिस अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों के अनुसार, केस से जुड़े सभी साक्ष्यों और बयानों की जांच की जा रही है ताकि अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।

इस बीच, आरोपी की अंतरिम ज़मानत को लेकर कानूनी हलकों में भी चर्चा जारी है, क्योंकि अदालत ने मानवीय आधार पर अस्थायी राहत दी है, जबकि मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।

कुल मिलाकर यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सबूतों और सुनवाई के आधार पर लिया जाएगा।

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