तेलंगाना

कोविड से पति की मौत के बाद नहीं मिला बीमा, अब आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला

Ratna Netam
6 Aug 2026 2:49 PM IST
कोविड से पति की मौत के बाद नहीं मिला बीमा, अब आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला
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तेलंगाना : राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर कमिशन) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस को सेवा में कोताही का दोषी ठहराते हुए एक विधवा महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह महिला को 76 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करे। यह मामला उस समय सामने आया जब महिला के पति की कोविड-19 संक्रमण से मौत के बाद इंश्योरेंस कंपनी ने उनका लाइफ इंश्योरेंस क्लेम खारिज कर दिया था। आयोग ने माना कि कंपनी क्लेम अस्वीकार करने के लिए पर्याप्त और ठोस आधार साबित नहीं कर सकी।
मामले के अनुसार, महिला के पति ने 30 मार्च 2021 को एचडीएफसी बैंक से 55 लाख रुपये का होम लोन लिया था। इस लोन के साथ उन्होंने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की मास्टर पॉलिसी के तहत एक ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस योजना भी ली थी। इस बीमा के लिए उनके लोन खाते से 81,053 रुपये प्रीमियम के रूप में काटे गए थे। पॉलिसी लेने के कुछ ही समय बाद, 14 मई 2021 को कोविड-19 संक्रमण के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
पति की मृत्यु के बाद महिला ने पॉलिसी की नामित (नॉमिनी) होने के नाते बीमा कंपनी से क्लेम की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को मृत्यु प्रमाण पत्र सहित सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए। महिला का आरोप था कि इसके बावजूद कंपनी ने लंबे समय तक उनके आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया और बार-बार अनुरोध तथा कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी मामले को टालती रही। आखिरकार कंपनी ने क्लेम को खारिज कर दिया, जिसके बाद महिला ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की ओर से कई दलीलें दी गईं। कंपनी ने कहा कि संबंधित पॉलिसी में कोविड-19 का अलग से कवरेज नहीं था और इसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम भी जमा नहीं कराया गया था। साथ ही कंपनी का यह भी दावा था कि पॉलिसीधारक ने बीमा लेते समय अपनी स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी, जैसे टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर, छिपाई थी। कंपनी के अनुसार, यह बीमा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन था और इसी आधार पर क्लेम अस्वीकार किया गया। इसके अलावा कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि शिकायत निर्धारित समय सीमा के बाद दर्ज कराई गई थी।
हालांकि, तेलंगाना कंज्यूमर कमिशन ने कंपनी की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग के अध्यक्ष मामिदी क्रिस्टोफर तथा सदस्य एस. संध्या रानी और के. वेंकटेश्वरलू की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मेडिकल रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि मृतक को पॉलिसी जारी होने से पहले डायबिटीज और हाइपरटेंशन था, लेकिन केवल इन बीमारियों के आधार पर किसी जीवन बीमा क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता।
आयोग ने यह भी कहा कि इंश्योरेंस कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि बीमाधारक ने जानबूझकर या धोखाधड़ी के इरादे से अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाई थी। इसलिए कंपनी का क्लेम खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता। आयोग ने इस व्यवहार को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत "सेवा में कोताही" की श्रेणी में रखा।
वहीं, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में एचडीएफसी बैंक की कोई स्वतंत्र लापरवाही या गलती साबित नहीं हुई। इसलिए बैंक के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया गया और पूरी जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर तय की गई।
अपने आदेश में आयोग ने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस को 45 दिनों के भीतर महिला को कुल 76 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसमें ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत 75.31 लाख रुपये का क्लेम, मानसिक पीड़ा और सेवा में कोताही के लिए 75 हजार रुपये का मुआवजा तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 25 हजार रुपये शामिल हैं।
यह फैसला उन बीमा उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके दावे विभिन्न कारणों का हवाला देकर खारिज कर दिए जाते हैं। आयोग ने अपने आदेश के माध्यम से स्पष्ट किया है कि बीमा कंपनियां केवल सामान्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों का हवाला देकर दावों को अस्वीकार नहीं कर सकतीं, जब तक कि धोखाधड़ी या जानबूझकर जानकारी छिपाने के पर्याप्त और ठोस प्रमाण मौजूद न हों। यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और बीमा कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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