तेलंगाना
तुम्मिदिहट्टी बैराज परियोजना पर रेवंत रेड्डी और फडणवीस की अहम बैठक
Ratna Netam
26 Oct 2026 2:52 PM IST

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मुंबई। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सोमवार, 26 अक्टूबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुंबई के सह्याद्रि स्टेट गेस्ट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित तुम्मिदिहट्टी बैराज परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। तेलंगाना सरकार ने प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित बैराज के लिए 152 मीटर पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) की मंजूरी देने का आग्रह किया है। बैठक में तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
152 मीटर ऊंचाई पर बैराज निर्माण की मांग
तेलंगाना सरकार का कहना है कि तुम्मिदिहट्टी बैराज को 152 मीटर के स्तर पर बनाना जरूरी है, ताकि प्राणहिता नदी से पर्याप्त मात्रा में पानी सिंचाई परियोजनाओं तक पहुंचाया जा सके। महाराष्ट्र सरकार पहले 148 मीटर के स्तर पर निर्माण के लिए सहमत हुई थी, लेकिन तेलंगाना का तर्क है कि इस ऊंचाई से अपेक्षित मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा।रेवंत रेड्डी सरकार का मानना है कि बैराज की ऊंचाई बढ़ाने से गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से पानी को आगे पहुंचाना आसान होगा। इससे पानी उठाने के लिए बिजली पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा।
दो लाख एकड़ कृषि भूमि को मिलेगा फायदा
तुम्मिदिहट्टी बैराज परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तरी तेलंगाना के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। विशेष रूप से अविभाजित आदिलाबाद जिले के किसानों को इसका लाभ पहुंचाने की योजना है।सरकार के अनुसार, इस परियोजना से लगभग दो लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। आदिलाबाद क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रहते हैं और कई इलाके लंबे समय से सिंचाई सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं।परियोजना के माध्यम से किसानों को नियमित पानी उपलब्ध कराने के साथ पेयजल आपूर्ति में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
महाराष्ट्र में करीब 2300 एकड़ जमीन प्रभावित होने का अनुमान
बैराज की ऊंचाई को लेकर दोनों राज्यों के बीच सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा जलमग्न होने वाली भूमि का है। तेलंगाना के सिंचाई अधिकारियों के अनुसार, यदि बैराज का पूर्ण जलाशय स्तर 152 मीटर रखा जाता है, तो महाराष्ट्र में लगभग 2300 एकड़ भूमि जलमग्न हो सकती है।वहीं, 150 मीटर के स्तर पर निर्माण होने की स्थिति में प्रभावित भूमि का क्षेत्रफल 1000 एकड़ से कम रहने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित परियोजना से महाराष्ट्र का कोई गांव जलमग्न नहीं होगा। हालांकि, इन आकलनों के आधार पर दोनों राज्यों के बीच तकनीकी सहमति बनना जरूरी है।
पहले भी केंद्र सरकार से मांगा गया था सहयोग
तुम्मिदिहट्टी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए तेलंगाना सरकार पहले भी कई स्तरों पर प्रयास कर चुकी है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 26 मई को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बातचीत का अनुरोध किया था।इसके बाद 11 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की मांग की गई। अगस्त में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।एक सितंबर को केंद्रीय जल आयोग की पहल पर दोनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें बैराज की ऊंचाई और तकनीकी मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
अब दोनों राज्यों की सहमति पर टिकी परियोजना
तुम्मिदिहट्टी बैराज मूल प्राणहिता-चेवेल्ला सिंचाई परियोजना का हिस्सा रहा है। बाद में तेलंगाना की पिछली सरकार ने सिंचाई योजना में बदलाव करते हुए कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना को प्राथमिकता दी थी।अब रेवंत रेड्डी सरकार इस प्रस्ताव को दोबारा आगे बढ़ाना चाहती है। हालांकि, 152 मीटर के स्तर पर निर्माण को लेकर महाराष्ट्र की अंतिम सहमति की पुष्टि अभी नहीं हुई है।दोनों राज्यों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक सहमति बनने के बाद ही परियोजना के अगले चरण, भूमि अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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