तेलंगाना

IIIT-हैदराबाद ने सहज ड्रोन के साथ नई ऊंचाइयां छुईं

Subhi
1 Nov 2026 2:43 PM IST
IIIT-हैदराबाद ने सहज ड्रोन के साथ नई ऊंचाइयां छुईं
x

हैदराबाद: क्या होगा अगर रोबोट इंसानों की तरह निर्देशों को समझने लगें, चीजों को पहचान लें और बिना सटीक कोऑर्डिनेट्स (निर्देशांक) दिए ही अपना काम पूरा कर लें? और क्या हो अगर वे ऐसी रुकावटों को भी पहचान सकें, जिन्हें उनके कैमरे नहीं देख पाते—जैसे कि कांच की दीवारें?

ये संभावनाएं इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIIT-H) में हकीकत बन रही हैं। यहाँ के शोधकर्ताओं ने अमेरिका के पिट्सबर्ग में आयोजित 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटेलिजेंट रोबोट्स एंड सिस्टम्स (IROS) 2026' में कई नए आविष्कार पेश किए।

संस्थान ने रिसर्च के क्षेत्र में भी बड़ी कामयाबी हासिल की। ​​उन्होंने 10 रिसर्च पेपर और एक वर्कशॉप पेपर पेश किया, और वे सभी स्वीकार कर लिए गए। कॉन्फ्रेंस की कुल स्वीकृति दर 37% से भी कम थी, जबकि IIIT-H का स्कोर 100% रहा। इसके अलावा, संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक वर्कशॉप में 'बेस्ट पेपर अवार्ड' भी जीता।

'AERMANI-VLM' का उदाहरण लें। रोबोटिक आर्म्स (हाथों) वाले ड्रोन उन कामों के लिए बहुत उपयोगी हो सकते हैं, जिनमें किसी चीज़ को खोजना, उठाना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना शामिल हो। लेकिन, ड्रोन को सिर्फ पहले से दिए गए कोऑर्डिनेट्स का पालन करने के बजाय यह समझाना कि इंसान असल में क्या चाहता है, एक अलग ही चुनौती है।

यह फ्रेमवर्क ड्रोन को इंसानी भाषा में दिए गए निर्देशों को समझने और उसके अनुसार काम करने में सक्षम बनाता है। यह AI मॉडल के निर्णय लेने की प्रक्रिया को ड्रोन की शारीरिक गतिविधियों से अलग रखता है, और पहले से तय सुरक्षित कार्यों का ही इस्तेमाल करता है, ताकि कोई असुरक्षित या अव्यावहारिक निर्देश न माना जाए।

Next Story