तेलंगाना

IIIT‑H प्रोजेक्ट्स को NeurIPS 2026 के लिए चुना गया

Tulsi Rao
4 Nov 2026 10:46 AM IST
IIIT‑H प्रोजेक्ट्स को NeurIPS 2026 के लिए चुना गया
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हैदराबाद: किसी कमरे की एक सामान्य तस्वीर और उसके साथ दिए गए लिखित निर्देश की मदद से, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसानी गतिविधियों का एनीमेशन तैयार कर सकता है। यह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद (IIIT-H) के उन पांच रिसर्च प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिन्हें AI के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'NeurIPS 2026' के लिए चुना गया है।

प्रोफेसर चारू शर्मा के नेतृत्व में तैयार 'ENACT' नाम का यह प्रोजेक्ट, मौजूदा AI टूल्स का इस्तेमाल करके किसी तस्वीर को समझता है, एक एक्शन की योजना बनाता है और उससे जुड़ी गतिविधि (movement) को जनरेट करता है। प्रोफेसर शर्मा ने बताया, "चूंकि इनडोर वातावरण की सामान्य तस्वीरें काफी आसानी से मिल जाती हैं, इसलिए हमने इनका और लिखित निर्देशों का उपयोग करके एनिमेटेड मोशन तैयार किया है।" यह तकनीक रोबोट के लिए ट्रेनिंग मटेरियल बनाने में मददगार हो सकती है, हालांकि फिलहाल यह केवल स्थिर दृश्यों (static scenes) तक ही सीमित है; यह दराज खोलने या किसी वस्तु को उठाने जैसे कामों को अभी नहीं कर सकती।

एडोब रिसर्च (Adobe Research) के साथ मिलकर तैयार किया गया एक और रिसर्च पेपर, AI द्वारा बनाई गई तस्वीरों के अलग-अलग हिस्सों को नियंत्रित करने की चुनौती पर काम करता है। यह उपयोगकर्ताओं को किसी जानवर को एक पूरी इकाई (subject) मानने के बजाय, उसके विशिष्ट अंगों—जैसे कि 'आगे का बायां पैर'—को नियंत्रित करने की सुविधा देता है। एडोब रिसर्च के हर्ष रंगवानी ने बताया, "नैनो बनाना 2 (Nano Banana2), फ्लक्स 2.0 (Flux2.0) जैसे इमेज जनरेशन मॉडल्स में, तस्वीर के अलग-अलग हिस्सों को नियंत्रित करना अभी भी एक अनसुलझी समस्या है।"

बाकी तीन रिसर्च प्रोजेक्ट्स AI सिस्टम को अधिक निष्पक्ष (fair) और कुशल बनाने पर केंद्रित हैं। प्रोफेसर पवन कुमार के मार्गदर्शन में अंकिता कुशवाहा, किरण रविश और प्रीति लांबा द्वारा तैयार 'Safe-Fair MACPO' प्रोजेक्ट, सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह ट्रैक करता है कि क्या कोई AI एजेंट अपने हिस्से से कहीं ज्यादा काम तो नहीं कर रहा है—इसके लिए यह 'फेयरनेस डेट' (fairness debt) नामक एक पैमाने का उपयोग करता है। प्रोफेसर साई किरण बुलुसु के नेतृत्व में, IISc के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर तैयार किया गया 'FedUCA' प्रोजेक्ट, उन संगठनों की समस्या को हल करता है जो कोलैबोरेटिव AI ट्रेनिंग से बाहर हो जाते हैं। यह प्रोजेक्ट उनके योगदान को इस तरह समायोजित (adjust) करता है कि उन्हें मिलने वाले संभावित लाभों के अनुरूप उनका योगदान बना रहे।

प्रोफेसर प्रियेश शुक्ला और निसर्ग नरगुंड द्वारा तैयार 'TernaryLM' एक 132 मिलियन पैरामीटर वाला लैंग्वेज मॉडल है, जो केवल तीन पैरामीटर वैल्यू— -1, 0 और +1—का उपयोग करता है। इसने 32-बिट वाले समान मॉडल की तुलना में 2.4 गुना कम मेमोरी का इस्तेमाल किया और MRPC बेंचमार्क पर 82.47 प्रतिशत स्कोर हासिल किया। इसने 55 गुना कम ट्रेनिंग डेटा का इस्तेमाल करने के बावजूद DistilBERT से बेहतर प्रदर्शन किया। इस रिसर्च पेपर को NeurIPS की 'ग्लोबलसाउथAI' (GlobalSouthAI) वर्कशॉप में पेश किया जाएगा।

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