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Hyderabad हैदराबाद: तेलंगाना हाई कोर्ट की जस्टिस टी. माधवी देवी ने बुधवार को पुलिस को निर्देश दिया कि वे एक पुलिस स्टेशन का CCTV फुटेज सुरक्षित रखें और उसे कोर्ट में पेश करें। यह आदेश दो वकीलों के आरोपों के बाद दिया गया, जिन्होंने कहा था कि उन्हें एक आम नागरिक के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना को रिकॉर्ड करने से रोका गया और उन्हें स्टेशन से बाहर भी नहीं जाने दिया गया।
यह रिट याचिका वकीलों फ़िज़ा शाह और शेख़ अकीब ने 'लंच मोशन' के ज़रिए दायर की थी। उन्होंने हाई कोर्ट का रुख़ करते हुए आरोप लगाया कि 22 सितंबर को जब वे अपने पेशेवर काम से एक पुलिस स्टेशन गए थे, तो वहाँ एक घटना हुई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, पुलिस स्टेशन में उन्होंने पुलिस को एक आम नागरिक के साथ कथित तौर पर बुरा बर्ताव करते देखा। जब उन्होंने इस व्यवहार पर आपत्ति जताई, तो उन्होंने अपने मोबाइल फ़ोन पर घटना को रिकॉर्ड करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें घटना रिकॉर्ड करने से रोका और उन्हें पुलिस स्टेशन से बाहर जाने से भी रोक दिया।
याचिकाकर्ताओं ने आगे आरोप लगाया कि जब उन्होंने कथित दुर्व्यवहार के बारे में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने बुधवार को डाक से शिकायत भेजी और डाक रसीद कोर्ट के सामने पेश की। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि पुलिस को संबंधित पुलिस स्टेशन से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य समकालीन रिकॉर्ड (जैसे जनरल डायरी एंट्री) को सुरक्षित रखने और उन्हें हाई कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया जाए। राज्य की ओर से पेश हुए होम डिपार्टमेंट के असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर ने निर्देशों के आधार पर बताया कि स्टेशन पर याचिकाकर्ताओं और पुलिस के बीच बहस हुई थी।
राज्य के अनुसार, याचिकाकर्ता एक ऐसे मामले के सिलसिले में पुलिस स्टेशन गए थे जिससे उनका कोई लेना-देना नहीं था और उन्होंने कथित तौर पर मामले में दखल दिया था। सरकारी वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि बाद में पुलिस ने इस घटना के लिए माफ़ी मांग ली थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद, जस्टिस माधवी देवी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 22 सितंबर को सुबह 11 बजे से रात 8 बजे के बीच संबंधित पुलिस स्टेशन का CCTV फुटेज सुरक्षित रखें। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि CCTV फुटेज की एक कॉपी पेन ड्राइव में कोर्ट के सामने पेश की जाए, साथ ही फुटेज की प्रमाणिकता साबित करने वाला एक सर्टिफ़िकेट भी हो। कोर्ट ने संबंधित प्रतिवादी को निर्देश दिया कि वे फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत कदम उठाएं। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
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