
Hyderabad हैदराबाद : AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर आपत्ति जताई है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी सुरक्षा देने की बात कही गई है। यूनियन कैबिनेट के इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
ओवैसी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा नहीं दिया जा सकता। उनके अनुसार, यह गीत एक देवी की स्तुति पर आधारित है और इसे सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का दर्जा अलग-अलग ऐतिहासिक और संवैधानिक आधारों पर तय किया गया है।
केंद्र सरकार के फैसले के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक मत सामने आ रहे हैं। कुछ वर्ग इस फैसले को राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विवादास्पद मान रहे हैं।
ओवैसी ने कहा कि किसी भी देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर स्पष्ट संवैधानिक व्यवस्था होती है और उसे बदलना या समान दर्जा देना संवेदनशील विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है, जहां सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान जरूरी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस फैसले के बाद आने वाले समय में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे पर और बहस देखने को मिल सकती है। कई विपक्षी दल भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने की तैयारी में हैं।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर लिया गया निर्णय राष्ट्रीय भावना और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जबकि इसे कानूनी सुरक्षा देने का उद्देश्य इसके सम्मान को बढ़ाना है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश में राष्ट्रीय प्रतीकों और उनकी व्याख्या को लेकर राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।





