
Hyderabad हैदराबाद : शहर और आसपास के इलाकों में स्कूल और कॉलेज लौटने वाले छात्रों के लिए इस साल ट्रांसपोर्टेशन चार्ज में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। वेस्ट एशिया में संकट और इसके असर से LPG फ्यूल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे प्राइवेट ऑटो रिक्शा और कार ऑपरेटरों को बच्चों के लिए चार्ज बढ़ाना पड़ा है।
शहर के कई माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल और कॉलेज भेजने के लिए प्राइवेट ऑटो रिक्शा और कारों पर निर्भर हैं। फ्यूल की बढ़ी कीमतों के कारण चार्ज में 1,000 रुपये से 1,200 रुपये तक का इजाफा किया गया है। ऑटो और प्राइवेट ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि LPG फ्यूल की कीमतों में लगातार उछाल ने उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है, जिसके चलते यह बढ़ोतरी अनिवार्य हो गई है।
ऑटो रिक्शा ड्राइवर मोहम्मद गौस ने बताया कि फरवरी में LPG फ्यूल की कीमत लगभग 58 रुपये प्रति लीटर थी। वेस्ट एशिया संकट के बाद कीमत बढ़कर 125 रुपये प्रति लीटर हो गई थी, और अब यह 93 रुपये प्रति लीटर है। उन्होंने कहा कि फ्यूल की इस तेजी से बढ़ी कीमत ने उनकी आमदनी पर गंभीर असर डाला, इसलिए बच्चों के लिए चार्ज बढ़ाना जरूरी हो गया।
दिलसुखनगर के एक अन्य ऑटो ड्राइवर के. वामशी ने बताया कि मार्च और अप्रैल में फ्यूल स्टेशनों पर लंबी लाइनों में खड़े होकर उन्हें 125 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से फ्यूल खरीदना पड़ा। इस वजह से उन्हें भारी नुकसान हुआ और अब उनके लिए चार्ज बढ़ाना अपरिहार्य है।
इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ा है, जो पहले ही स्कूल और कॉलेज के खर्च उठा रहे हैं। कई माता-पिता को अब अपने बच्चों के स्कूल जाने के खर्च पर अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ रहा है। कुछ अभिभावकों ने कहा कि चार्ज में यह बढ़ोतरी अचानक आई और उन्हें इसके लिए पहले से तैयारी करने का समय नहीं मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्ट एशिया संकट के कारण वैश्विक पेट्रोलियम बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात बन गया है। भारत जैसे देश, जो LPG और पेट्रोल-डीज़ल पर आयात निर्भर हैं, वहां इसका सीधा असर घरेलू फ्यूल कीमतों पर पड़ता है। इसके कारण ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में लागत बढ़ जाती है, और इसका भार सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जाता है।
इस साल की शुरुआत में स्कूलों और कॉलेजों के शुरू होने से पहले यह चार्ज बढ़ोतरी कई परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गई है। प्राइवेट ऑटो ऑपरेटरों का कहना है कि भविष्य में भी यदि फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही, तो चार्ज में और इजाफा संभव है।
इस तरह, वेस्ट एशिया संकट का असर न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिख रहा है, बल्कि आम नागरिकों की रोज़मर्रा की जिंदगी, खासकर छात्रों के ट्रांसपोर्टेशन पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है।





