तेलंगाना

Hyderabad: डॉक्टरों ने बच्चों के लिए स्विमिंग पूल सुरक्षा गाइड जारी की

Ratna Netam
7 May 2026 7:58 PM IST
Hyderabad: डॉक्टरों ने बच्चों के लिए स्विमिंग पूल सुरक्षा गाइड जारी की
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Hyderabad.हैदराबाद: भारतीय अंतरिक्ष और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक बड़ी सफलता देखने को मिली है। हैदराबाद की एयरोस्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace ने हाल ही में $60 मिलियन (लगभग 480 करोड़ रुपये) की नई फंडिंग राउंड पूरी की है। इस फंडिंग के बाद कंपनी ने यूनिकॉर्न दर्जा हासिल कर लिया है, यानी अब इसका मूल्यांकन $1 बिलियन से अधिक है।
Skyroot Aerospace की स्थापना 2018 में की गई थी और यह कंपनी छोटे उपग्रहों और लॉन्च व्हीकल्स के लिए अभिनव समाधान विकसित करती है। कंपनी ने अब तक कई सफल प्रायोगिक लॉन्च किए हैं और भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोला है।
कंपनी के संस्थापक और सीईओ पुलकित अग्रवाल ने कहा कि यह फंडिंग उन्हें भविष्य में छोटे और मध्यम आकार के उपग्रह लॉन्च के लिए अपनी तकनीक को और विकसित करने का अवसर देगी। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी का लक्ष्य है अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत का नेतृत्व बढ़ाना।
Skyroot Aerospace ने बताया कि नई फंडिंग राउंड में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू निवेशकों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रमुख निवेशकों में वैश्विक एयरोस्पेस फंड्स और टेक्नोलॉजी वेंचर्स शामिल हैं। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि निवेश राशि का उपयोग अनुसंधान एवं विकास, नए प्रोजेक्ट्स, और लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि Skyroot की सफलता भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। निजी कंपनियों द्वारा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ने से भारत में अनुसंधान और नवाचार को नया impulso मिलेगा। इसके अलावा, यह कदम अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को वैश्विक स्तर पर बढ़ाएगा।
Skyroot Aerospace का यूनिकॉर्न बनना इस बात का भी संकेत है कि भारतीय स्टार्टअप्स सिर्फ डिजिटल या ई-कॉमर्स क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। एयरोस्पेस, ऊर्जा, और विज्ञान आधारित तकनीकी क्षेत्रों में भी भारतीय स्टार्टअप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।
इस फंडिंग के बाद Skyroot अगले दो वर्षों में कई नए लॉन्च मिशन करने की योजना बना रही है। कंपनी छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को वाणिज्यिक और अनुसंधान उद्देश्यों के लिए लॉन्च करने की दिशा में काम करेगी। साथ ही, वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारतीय प्रौद्योगिकी का हिस्सा बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
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