
शहर में कम उम्र में वाहन चलाने की बढ़ती घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, जनवरी से मई के बीच सिर्फ पांच महीनों में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के 2,539 मामले दर्ज किए गए हैं। इस बढ़ती समस्या को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है।
इस मुद्दे पर हाल ही में ‘स्कूल छात्रों की सड़क सुरक्षा’ को लेकर विभिन्न हितधारकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जोएल डेविस ने कहा कि नाबालिगों की ओर से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए अब नए और कड़े उपायों पर विचार किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि स्कूलों को ऐसे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर नेगेटिव मार्क्स देने चाहिए, जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए जाते हैं। यह प्रस्ताव मौजूदा दंडात्मक कार्रवाइयों के अतिरिक्त होगा, जिसमें वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) रद्द करना और भारी जुर्माना लगाना शामिल है।
पुलिस के अनुसार, इस साल अब तक 719 वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट 12 महीने के लिए निलंबित किए जा चुके हैं। यह कार्रवाई उन मामलों में की गई है, जहां नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़े गए या उनके अभिभावकों की लापरवाही सामने आई।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले नाबालिगों को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से कानूनी रूप से वंचित रखा जाएगा। इस कदम का उद्देश्य कम उम्र में वाहन चलाने की प्रवृत्ति को रोकना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि कई मामलों में माता-पिता या अभिभावकों की अनुमति या लापरवाही के कारण नाबालिग वाहन चला रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए अब जिम्मेदारी केवल बच्चों पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और स्कूलों पर भी तय की जा रही है।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि स्कूल स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि छात्रों को ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा के महत्व के बारे में समझाया जा सके। पुलिस का मानना है कि शिक्षा संस्थानों की भागीदारी से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
अधिकारियों ने कहा कि शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और दुर्घटनाओं को देखते हुए इस तरह के मामलों पर सख्ती जरूरी है। पुलिस ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दें और नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
कुल मिलाकर, हैदराबाद में नाबालिगों की ड्राइविंग को रोकने के लिए प्रशासन अब बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर भी सख्त कदम शामिल हैं।





