तेलंगाना

Hyderabad : यादगिरिगुट्टा देवस्थानम बोर्ड नियुक्तियों पर विवाद, कांग्रेस में असंतोष के संकेत

Kavita2
1 July 2026 2:48 PM IST
Hyderabad : यादगिरिगुट्टा देवस्थानम बोर्ड नियुक्तियों पर विवाद, कांग्रेस में असंतोष के संकेत
x

हैदराबाद : यादगिरिगुट्टा देवस्थानम बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति को लेकर तेलंगाना की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे ने कांग्रेस पार्टी के भीतर और दलबदलू नेताओं के बीच असंतोष को उजागर कर दिया है। मुनुगोड़े से विधायक कोमाटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के फैसलों पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा निर्णय बताया है।

विवाद तब बढ़ा जब देवस्थानम बोर्ड के ट्रस्टी सदस्यों की सूची जारी की गई, जिसमें कई कांग्रेस नेताओं और हाल ही में पार्टी में शामिल हुए दलबदलू नेताओं के नाम शामिल हैं। इस सूची को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा है। खासकर उन नेताओं में नाराजगी अधिक है, जिनके क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व में उचित स्थान नहीं मिला।

मुनुगोड़े विधायक कोमाटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी ने इस फैसले पर खुलकर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वे मुनुगोड़े क्षेत्र से विधायक हैं और उनका विधानसभा क्षेत्र यादाद्री जिले के अंतर्गत आता है, इसके बावजूद उन्हें बोर्ड की नियुक्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने इसे पूरी तरह एकतरफा निर्णय करार दिया।

राजगोपाल रेड्डी ने कहा कि यदि निर्णय लेने से पहले उनसे सलाह ली जाती, तो वे यह सुनिश्चित करते कि उनके क्षेत्र से कम से कम एक प्रतिनिधि को बोर्ड में स्थान मिलता। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया में स्थानीय प्रतिनिधियों को नजरअंदाज करना सही नहीं है और इससे संगठनात्मक स्तर पर असंतोष बढ़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे फैसलों से पार्टी के भीतर स्थिति और जटिल हो सकती है। एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बोर्ड के चेयरमैन की नियुक्ति पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन मेंबरों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बुनियादी समझ की कमी दिखाई देती है। उनके अनुसार, निर्णय लेते समय यह ध्यान नहीं रखा गया कि किस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कैसे संतुलित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि राजनीतिक संतुलन और स्थानीय प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ विषय है।

इस विवाद ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान को भी उजागर कर दिया है। हाल ही में पार्टी में शामिल हुए नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाए रखने को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही थीं। अब देवस्थानम बोर्ड की नियुक्तियों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा है कि बोर्ड जैसे धार्मिक और प्रशासनिक संस्थानों में नियुक्तियों में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संतुलन का ध्यान रखा जाना चाहिए। कई नेताओं का मानना है कि यदि इस तरह के फैसलों में पारदर्शिता और परामर्श की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती, तो इससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ सकता है।

यादगिरिगुट्टा देवस्थानम बोर्ड राज्य के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में से एक है, जहां निर्णयों का प्रभाव न केवल प्रशासनिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी देखा जाता है। ऐसे में इसकी नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों ने सरकार और पार्टी दोनों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद केवल नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व शैली से भी जुड़ा हुआ है। दलबदलू नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल की कमी इस तरह के विवादों को जन्म दे सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता दी जा सकती है।

फिलहाल यह मामला तेलंगाना की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया है, जहां एक तरफ प्रशासनिक फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर असंतोष भी खुलकर सामने आ रहा है।

Next Story