
Telangana तेलंगाना: हनुमाकोंडा जिले में मेडिकल लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें कुरापति हॉस्पिटल के एक डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिवार का दावा है कि एक मरीज की सर्जरी अधूरी छोड़ दी गई, जिसके बाद उसे एक के बाद एक कई अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाना पड़ा। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित मरीज की पहचान श्यामपेट मंडल के गोविंदपुर गांव के किसान लिंगादरी राजेश्वर राव के रूप में हुई है। उनके परिजनों के अनुसार, शुरुआत में उन्हें पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद MGM Hospital में भर्ती कराया गया था। वहां जांच के बाद सर्जरी की सलाह दी गई।
परिवार का आरोप है कि MGM हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टर कुरापति रमेश ने ऑपरेशन के दौरान कुछ जटिलताएं आने का हवाला देते हुए मरीज को अपने निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की सलाह दी। इसके बाद मरीज को कुरापति हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां कथित तौर पर सर्जरी की प्रक्रिया शुरू की गई।
परिजनों का कहना है कि कुरापति हॉस्पिटल में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने अचानक यह कहते हुए प्रक्रिया बीच में ही रोक दी कि स्थिति जटिल हो गई है और आगे इलाज संभव नहीं है। इसके बाद मरीज को तुरंत NIMS Hyderabad में रेफर करने की सलाह दी गई। इस घटना से परिवार में घबराहट फैल गई और मरीज की हालत को लेकर चिंता और बढ़ गई।
इसके बाद मरीज को हैदराबाद के Yashoda Hospital में शिफ्ट किया गया, जहां उसका आगे इलाज किया गया। परिवार का कहना है कि इस पूरे दौरान उन्हें भारी आर्थिक खर्च उठाना पड़ा और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।
परिवार ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही बरती गई और इलाज के नाम पर मरीज को लगातार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा गया। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही सही तरीके से इलाज किया जाता, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
परिजनों ने डॉक्टर और संबंधित अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि मरीज की जान को खतरे में डालते हुए इलाज में लापरवाही और आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि मरीजों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इस मामले ने एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था और अस्पतालों में रेफरल प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जरी जैसे गंभीर मामलों में मरीज को बिना स्थिर किए दूसरे अस्पताल भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में जांच की मांग की जा रही है और परिवार को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा।





