तेलंगाना

हैदराबाद में जीएचएमसी का ‘इंडी पप्पी एडॉप्शन’ कार्यक्रम 31 अगस्त को

SHIDDHANT
30 Aug 2025 9:42 PM IST
हैदराबाद में जीएचएमसी का ‘इंडी पप्पी एडॉप्शन’ कार्यक्रम 31 अगस्त को
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HYDERABAD हैदराबाद। ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) 31 अगस्त को इंडी पप्पी एडॉप्शन कार्यक्रम का दूसरा संस्करण आयोजित करने जा रहा है। यह आयोजन बंजारा हिल्स स्थित कासु ब्रह्मानंद रेड्डी (केबीआर) नेशनल पार्क में सुबह 7 बजे से 10 बजे तक होगा। जीएचएमसी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सड़कों पर बेसहारा इंडी नस्ल के पिल्लों को एक सुरक्षित और प्यार भरा घर उपलब्ध कराना है। संस्था का कहना है कि सभी पिल्ले पूरी तरह स्वस्थ, टीकाकरण किए गए और डीवॉर्मिंग (कीड़े की दवा) से उपचारित हैं। इन्हें गोद लेने वाले परिवारों को किसी तरह का खर्च नहीं करना होगा, क्योंकि गोद लेना पूरी तरह निःशुल्क है। नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि इंडी नस्ल के पिल्ले बेहद चतुर, वफादार और स्थानीय वातावरण में आसानी से ढलने वाले होते हैं। इन्हें गोद लेना न केवल पशु प्रेमियों के लिए खुशी का अनुभव देगा, बल्कि शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या को कम करने में भी मदद करेगा। पिछले वर्ष हुए पहले संस्करण को शहरवासियों का उत्साहजनक समर्थन मिला था। बड़ी संख्या में लोगों ने पिल्लों को गोद लिया और उनके लिए एक सुरक्षित माहौल बनाया। इस बार भी निगम को अधिक भागीदारी की उम्मीद है।
जीएचएमसी अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने परिवारों के साथ इस कार्यक्रम में पहुंचें और इन पिल्लों को अपनाकर उन्हें नया जीवन दें। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में पशु संरक्षण और जिम्मेदार पालतू पशु स्वामित्व को लेकर जागरूकता भी बढ़ती है। कार्यक्रम के दौरान इच्छुक लोग सीधे पिल्लों से मिल सकेंगे और तुरंत गोद लेने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। निगम की पशु चिकित्सा टीम भी मौके पर मौजूद रहेगी, जो पिल्लों के स्वास्थ्य की जानकारी देगी और नए मालिकों को पालतू की देखभाल के बारे में मार्गदर्शन करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडी नस्ल के कुत्ते विदेशी नस्लों की तुलना में अधिक सहनशील और स्थानीय मौसम के अनुकूल होते हैं। ये न केवल सुरक्षा के लिए अच्छे होते हैं बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के भी अच्छे साथी बनते हैं। नगर निगम का मानना है कि अगर शहर के लोग इंडी पिल्लों को अपनाने के लिए आगे आते हैं, तो इससे न केवल पशु कल्याण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पशुओं और इंसानों के बीच बेहतर संबंध भी स्थापित होंगे। इस पहल को पशु प्रेमियों और स्वयंसेवी संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। वे इसे शहर में आवारा पशु प्रबंधन की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानते हैं
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