
Telangana तेलंगाना: तेलंगाना के पूर्व MLC कर्ण प्रभाकर ने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ढाई साल पूरे होने के बावजूद राज्य में कोई ठोस विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहा है।
कर्ण प्रभाकर ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने नए विकास कार्य शुरू करने के बजाय केवल पूर्ववर्ती भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स की नींव रखने और उनके उद्घाटन तक ही खुद को सीमित कर लिया है।
उन्होंने कहा कि जनता को जिन बड़े बदलावों और विकास परियोजनाओं की उम्मीद थी, वे अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। पूर्व MLC के अनुसार, सरकार का मुख्य ध्यान केवल उद्घाटन कार्यक्रमों और पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स के श्रेय लेने तक सीमित दिखाई देता है।
कर्ण प्रभाकर ने यह भी दावा किया कि राज्य में बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन और नई परियोजनाओं के विकास की गति धीमी पड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के समय जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उनके अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक कई विकास योजनाएं या तो रुकी हुई हैं या उनकी गति बहुत धीमी है।
पूर्व MLC ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में स्पष्ट दिशा का अभाव है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को लेकर सरकार को अधिक पारदर्शिता और गंभीरता दिखाने की जरूरत है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान राज्य की राजनीति में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच चल रही जुबानी जंग को और तेज कर सकते हैं। हाल के समय में तेलंगाना में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार अपने विकास कार्यों को लेकर आत्मविश्वास में है और विभिन्न क्षेत्रों में चल रही योजनाओं को जनता के सामने रखा जा रहा है।
कर्ण प्रभाकर के इन आरोपों ने एक बार फिर तेलंगाना की राजनीति में विकास कार्यों को लेकर बहस को तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और आने वाले समय में विकास की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।





