
हैदराबाद: तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में तेलुगु, अंग्रेज़ी और उर्दू भाषाओं में पढ़ने, लिखने और बोलकर पढ़ने की रफ़्तार (ओरल रीडिंग फ़्लुएंसी) में कमज़ोरी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। स्टेट काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के फ़ाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) बेसलाइन असेसमेंट से पता चला है कि कक्षा 2 से 5 तक के 10% से भी कम छात्र तीनों भाषाओं में परखे गए सभी कौशल (स्किल्स) के लिए तय योग्यता मानकों (बेंचमार्क) पर खरे उतरे।
जुलाई में किए गए इस असेसमेंट में सभी 33 ज़िलों के 19,552 प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों को शामिल किया गया। ज़िलेवार कवरेज हैदराबाद में 78.7% से लेकर जगतियाल में 99.4% तक रहा। राज्य-स्तरीय नतीजों से बुनियादी भाषाई कौशल, खासकर बोलकर पढ़ने की रफ़्तार और लिखने में भारी कमियां सामने आईं।
कक्षा 2 में, तेलुगु के सभी परखे गए कौशलों में केवल 2.2% छात्र योग्यता मानक पर खरे उतरे, जबकि अंग्रेज़ी में यह आंकड़ा 4.5% और उर्दू में 1.3% था। बोलकर पढ़ने की रफ़्तार भी कमज़ोर थी; तेलुगु में केवल 7.3%, अंग्रेज़ी में 12.6% और उर्दू में 10.4% छात्र ही मानक पर खरे उतरे। कक्षा 3 में, तेलुगु में केवल 4.6%, अंग्रेज़ी में 5.2% और उर्दू में 3.3% छात्र मानक पर खरे उतरे। लिखना भी एक और चिंता का विषय था, क्योंकि तेलुगु लेखन मानक पर केवल 11.9% छात्र खरे उतरे, जबकि अंग्रेज़ी में यह 10.8% और उर्दू में 10.4% था।
कक्षा 4 में, तेलुगु के परखे गए कौशलों में केवल 4.4% छात्र मानक पर खरे उतरे। अंग्रेज़ी में यह आंकड़ा 9.1% और उर्दू में 6.2% था। तेलुगु में बोलकर पढ़ने की रफ़्तार कमज़ोर थी, जिसमें केवल 8.3% छात्र ही मानक पर खरे उतरे।





