तेलंगाना

बोनालु उत्सव में शामिल हुईं फारिया कट्टरपंथियों ने घेरा

Ratna Netam
16 Aug 2026 4:10 PM IST
बोनालु उत्सव में शामिल हुईं फारिया कट्टरपंथियों ने घेरा
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हैदराबाद : तेलुगु अभिनेत्री फरिया अब्दुल्ला को हैदराबाद में आयोजित बोनालु उत्सव में हिस्सा लेने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। फरिया 9 अगस्त को हैदराबाद के पुराने शहर स्थित श्री सिंहवाहिनी महाकाली मंदिर में आयोजित समारोह में पहुंची थीं। पारंपरिक परिधान में नजर आईं अभिनेत्री ने सिर पर बोनम रखा और पोथुराजु कलाकारों के साथ शोभायात्रा में हिस्सा लिया। समारोह के वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद जहां कई लोगों ने उनकी प्रशंसा की, वहीं कुछ यूजर्स ने उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने फरिया के मंदिर जाने और हिंदू त्योहार में शामिल होने पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। कुछ यूजर्स ने उन्हें काफिर तक कह दिया। लगातार हो रही आलोचना के बीच अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो शेयर कर अपनी धार्मिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नफरत का जवाब नफरत से नहीं देंगी और प्रेम, एकता तथा शांति का संदेश देती रहेंगी।
फरिया ने कहा कि उनके पिता संजय अब्दुल्ला का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। अभिनेत्री के अनुसार उनके पिता ने इस्लाम की अच्छी बातों से प्रभावित होकर यह धर्म अपनाया था। इसी वजह से उन्हें बचपन से इस्लाम के सकारात्मक मूल्यों और शिक्षाओं के बारे में बताया गया।
अभिनेत्री ने अपने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि जो लोग उन्हें गलत रास्ते पर चलने वाली या काफिर मानते हैं, वह उनके लिए भी शुभकामनाएं देती हैं। फरिया ने कहा कि वह पेड़ों, चट्टानों और तितलियों सहित प्रकृति की हर चीज में जीवन और ईश्वर की सुंदरता देखती हैं। अगर कोई व्यक्ति प्रत्येक जीव और इंसान में मौजूद सुंदरता तथा ईश्वर को नहीं देख पाता, तो वह जीवन का बहुत कुछ अनुभव करने से वंचित रह जाता है।
फरिया वीडियो के दौरान कई बार भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि वह प्रेम को लेकर आक्रामक रहेंगी और अपने खिलाफ नफरत फैलाने वालों को भी प्यार भेजेंगी। उनका दिल सच्चा है और उन्होंने प्रेम, आशीर्वाद तथा कृतज्ञता की शक्ति को महसूस किया है। फरिया ने प्रेम, एकता और शांति के लिए प्रार्थना करने को अपनी बगावत और क्रांति बताया।
परिवार में अलग-अलग धार्मिक प्रभाव
फरिया का परिवार अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके पिता हिंदू परिवार में पैदा हुए और बाद में मुस्लिम बने। उनकी मां कौसर सुल्ताना का जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ, लेकिन बाद में उन्होंने हिंदू आध्यात्मिकता और ध्यान में गहरी रुचि विकसित की। अभिनेत्री का कहना है कि इसी बहुसांस्कृतिक माहौल में उनकी परवरिश हुई, इसलिए मंदिर और दूसरे धार्मिक स्थल उनके लिए हमेशा पवित्र रहे हैं।
फरिया ने बचपन की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी मां से अल्लाह शब्द का अर्थ पूछा था। उनकी मां ने जवाब दिया था कि इसका अर्थ प्रकाश और हर जगह मौजूद शक्ति है। इसी सोच ने उन्हें सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान करना सिखाया।
हिंदू संगठनों ने किया समर्थन
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑनलाइन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए महिलाओं का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने सवाल किया कि किसी महिला को दूसरे समुदाय के त्योहार में शामिल होने या मंदिर जाने के कारण निशाना बनाना कैसे उचित हो सकता है। उन्होंने कट्टर सोच की आलोचना करते हुए फरिया के खिलाफ हिंसक या धमकी भरी भाषा का विरोध किया।
विश्व हिंदू रक्षा परिषद की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष यमुना पाठक ने भी ट्रोलिंग की निंदा की। उन्होंने इसे दुर्भावनापूर्ण और धार्मिक आधार पर एक महिला को निशाना बनाने वाला व्यवहार बताया। पाठक ने कहा कि भारत धार्मिक नीति नहीं, बल्कि संविधान से संचालित होता है। संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 नागरिकों को समानता, अभिव्यक्ति, गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार देते हैं।
बोनालु तेलंगाना का प्रमुख लोकपर्व है, जो देवी महाकाली और उनके विभिन्न स्वरूपों को समर्पित है। इसमें महिलाएं सजे हुए बर्तन में चावल, गुड़ और अन्य प्रसाद रखकर देवी को अर्पित करती हैं। फरिया ने कहा कि यह तेलंगाना की वही संस्कृति है, जिससे वह स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करती हैं।
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