
Telangana तेलंगाना: शहर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की निवासी नैथम भाग्यलक्ष्मी ने अपनी क्रिएटिविटी से फेंकी हुई बोतलों को नए जीवन और सुंदरता दे दी है। बहुत से लोग खाली बोतलों को कचरे की तरह फेंक देते हैं, लेकिन भाग्यलक्ष्मी ने इन्हें आर्टवर्क में बदलकर न केवल कला में महारत हासिल की है, बल्कि इससे अपनी आमदनी का जरिया भी बनाया है।
भाग्यलक्ष्मी ने बताया कि बचपन से ही उन्हें आर्ट और क्राफ्टिंग का शौक था। स्कूल के दिनों में पेंसिल से स्केच बनाना, 10 साल की उम्र में मेहंदी डिज़ाइन तैयार करना और धीरे-धीरे पेंटिंग और क्रिएटिव आर्ट में रुचि बढ़ी। उन्होंने कहा, “लोग शराब की खाली बोतलें फेंक सकते हैं। लेकिन जब मैं उनका लुक बदलकर उन्हें देवी-देवताओं, फूलों, पत्तियों और प्रकृति के नज़ारों की पेंटिंग में बदलती हूं, तो वे मेरे लिए कीमती बन जाती हैं।”
भाग्यलक्ष्मी का आर्टवर्क सिर्फ पेंटिंग तक सीमित नहीं है। वह मोती, शीशे और चमकीले पेंट का इस्तेमाल करके बोतलों पर तीन-आयामी डिजाइन बनाती हैं। उनकी कलाकृतियों में हिंदू देवी-देवताओं के चित्र, प्राकृतिक दृश्यों और जटिल फूल-पत्ती के पैटर्न शामिल हैं। इस प्रक्रिया में खाली बोतलों का नया जीवन बनता है और वे घर, ऑफिस या गिफ्ट आइटम के रूप में इस्तेमाल की जा सकती हैं।
महिला ने बताया कि सोशल मीडिया और लोकल मार्केट में उनके आर्टवर्क की काफी मांग है। लोग उनके डिजाइन खरीदते हैं और कई बार विशेष अवसरों जैसे शादी, जन्मदिन या त्योहार के लिए भी ऑर्डर देते हैं। “मेरी क्रिएटिविटी और मेहनत को देखकर लोग सराहना करते हैं। इससे मुझे अपनी स्किल्स के साथ-साथ आय का अच्छा स्रोत भी मिल गया है,” उन्होंने कहा।
भाग्यलक्ष्मी का कहना है कि उनकी कोशिश है कि फेंके गए सामान को सुंदर और उपयोगी बनाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि इस कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सकता है। खाली बोतलों और अन्य कचरे को रीसायकल और क्रिएटिव तरीके से इस्तेमाल करना न सिर्फ कला को बढ़ावा देता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।
इस पहल ने भाग्यलक्ष्मी को स्थानीय समुदाय में एक पहचान दिलाई है। कई स्कूल और सामाजिक कार्यक्रमों में बच्चों को आर्टवर्क बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिससे युवा पीढ़ी में क्रिएटिविटी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
भाग्यलक्ष्मी के प्रयास से यह साबित होता है कि साधारण वस्तुओं को सही दृष्टिकोण और मेहनत से अद्वितीय बनाया जा सकता है। खाली बोतलों की यह कला न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा भी बन रही है कि कचरे को कचरा ही न समझें, बल्कि उसे कला में बदलने का रास्ता खोजें।





