तेलंगाना

अल नीनो प्रभाव: तेलंगाना ने सिंगूर-निर्भर जिलों के लिए ₹120 करोड़ जारी किए

Tulsi Rao
1 Nov 2026 3:09 PM IST
अल नीनो प्रभाव: तेलंगाना ने सिंगूर-निर्भर जिलों के लिए ₹120 करोड़ जारी किए
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हैदराबाद: 'एल नीनो' (El Nino) के संभावित असर को देखते हुए, तेलंगाना में पीने के पानी की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने विशेष फंड मंजूर किया है। इसमें संगारेड्डी, मेडक, कामारेड्डी और निजामाबाद जिलों के लिए 120 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। ये जिले सिंगूर जलाशय पर निर्भर हैं, जहां पानी का स्तर 'डेड स्टोरेज' (न्यूनतम स्तर) से भी नीचे चला गया है। इसके अलावा, अन्य जिलों में तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए हर जिले को 1 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

ग्रामीण जल आपूर्ति मंत्री धनसारी 'सीथक्का' अनसूया ने कहा कि इस फंड का इस्तेमाल उन इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए किया जाएगा, जहां पीने के पानी की किल्लत होने की आशंका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन व्यवस्थाओं में तेजी लाएं और यह सुनिश्चित करें कि लोगों को पानी की आपूर्ति में किसी तरह की परेशानी न हो।

मंत्री ने शनिवार को 'मिशन भगीरथ' और जन स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरों के साथ एक टेलीकॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने पीने के पानी की आपूर्ति की स्थिति और 'एल नीनो' के कारण होने वाली संभावित कमी से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे ऐसे गांवों और इलाकों की पहचान करें जहां भूजल स्तर (groundwater level) गिर गया है, और वहां स्थानीय जरूरतों के हिसाब से इंतजाम करें। इस टेलीकॉन्फ्रेंस में 'मिशन भगीरथ' के इंजीनियर-इन-चीफ कृपाकर रेड्डी, और 'मिशन भगीरथ' तथा जन स्वास्थ्य विभाग के मुख्य इंजीनियर, अधीक्षण इंजीनियर और कार्यकारी इंजीनियर शामिल हुए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उपलब्ध स्थानीय जल स्रोतों का इस्तेमाल करें। जहां जरूरत हो, वहां बोरवेल किराए पर लें और टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए हैंडपंप, सिंगल-फेज और थ्री-फेज जल आपूर्ति योजनाएं, कुएं और अन्य स्थानीय स्रोतों को चालू हालत में रखा जाना चाहिए।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उन गांवों की पहचान की जाए जहां 'मिशन भगीरथ' की आपूर्ति बाधित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी होने का इंतजार करने के बजाय, पहले से ही वैकल्पिक आपूर्ति योजनाएं तैयार कर लेनी चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण और 'एल नीनो' के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम गांव-गांव तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।

सीथक्का ने अधिकारियों को जलाशयों में पानी के स्तर की लगातार निगरानी करने और पीने के पानी के संसाधनों के प्रबंधन के लिए सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने भूजल को रिचार्ज करने के लिए कदम उठाने को भी कहा। इसके लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि हैदराबाद, मेडचल, खम्मम, यादद्री और अन्य इलाकों में हाल ही में हुई बारिश का पानी जमीन के अंदर जाए। पेयजल स्रोतों के पास बने मौजूदा रिचार्ज पिट और मैजिक पिट को चालू किया जाना चाहिए, ताकि वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) में मदद मिल सके। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस तरह के ढांचों से जुड़े सभी चल रहे कार्यों को दो दिनों के भीतर पूरा करें।

सिंगूर जलाशय से हैदराबाद और अविभाजित मेडक तथा निजामाबाद जिलों के कुछ हिस्सों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। इन हिस्सों में संगारेड्डी, कामारेड्डी, बांसवाड़ा, जुक्कल, येल्लारेड्डी, बोधन, मेडक और निजामाबाद शामिल हैं। इसके दायरे में सेरिलिंगमपल्ली और पाटनचेरु के CURE क्षेत्र भी आते हैं।

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