
हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के कथित शराब परिवहन घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, रामबाबू को बुधवार, 4 नवंबर 2026 को ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय में पेश होने और मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है। यह मामला आंध्र प्रदेश में पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल के दौरान शराब परिवहन के ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
अंबाती रामबाबू को समन जारी किए जाने से राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। जांच एजेंसी शराब परिवहन के लिए जारी किए गए ठेकों, उपठेकों और इनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठेकों के आवंटन में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं और कथित अनियमितताओं से किन लोगों अथवा संस्थाओं को आर्थिक लाभ पहुंचा।
अंबाती रामबाबू आंध्र प्रदेश की राजनीति में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वह राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में शराब परिवहन मामले में उनसे प्रस्तावित पूछताछ को राजनीतिक और जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, केवल समन जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित हो गया है। जांच एजेंसी पूछताछ के माध्यम से तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की पुष्टि करती है।
इस मामले में रामबाबू को पहले भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सितंबर 2026 में ईडी ने उन्हें कथित शराब परिवहन निविदा घोटाले के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था। उस समय हैदराबाद स्थित ईडी कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। बाद में एजेंसी की ओर से एक और नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई थी।
अब 4 नवंबर को प्रस्तावित पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी उनसे शराब परिवहन व्यवस्था और संबंधित ठेकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकती है।
यह मामला आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (APSBCL) के माध्यम से शराब परिवहन के लिए जारी किए गए टेंडरों से संबंधित है। जांच में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 से 2024 के दौरान शराब की ढुलाई के ठेकों में अनियमितताएं की गईं।
ईडी के अनुसार, कुछ कंपनियों और व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ठेकों और उपठेकों की व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अक्टूबर 2020 में शराब परिवहन के लिए जारी केंद्रीकृत टेंडर में निर्धारित दरें प्रचलित दरों के मुकाबले लगभग 15 से 20 प्रतिशत अधिक थीं।
इस ठेके से जुड़ी कंपनी सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। आरोप है कि कंपनी को ठेका दिए जाने के बाद वास्तविक परिवहन कार्य अन्य संस्थाओं के माध्यम से कराया गया।
ईडी की जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, अक्टूबर 2021 से मार्च 2024 के बीच संबंधित परिवहन अनुबंध से लगभग 349.78 करोड़ रुपये की प्राप्तियां हुई थीं। एजेंसी इन वित्तीय लेनदेन और उपठेकों से जुड़े लाभार्थियों की जांच कर रही है।
इस मामले में पूर्व मंत्री कारुमूरी वेंकट नागेश्वर राव के बेटे कारुमूरी सुनील कुमार की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण घटनाक्रम रही है।
ईडी ने सुनील कुमार को 18 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि शराब परिवहन के ठेकों और उपठेकों के कथित हेरफेर में उनकी भूमिका रही है।
गिरफ्तारी के बाद सुनील कुमार को अदालत में पेश किया गया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सुनील कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ा। ईडी ने संबंधित कंपनियों, वित्तीय लेनदेन और कथित लाभार्थियों की भूमिका की पड़ताल जारी रखी।
उल्लेखनीय है कि सुनील कुमार की गिरफ्तारी 18 जून 2026 को हुई थी। इसलिए 4 नवंबर को अंबाती रामबाबू की प्रस्तावित पूछताछ उनकी गिरफ्तारी के लगभग साढ़े चार महीने बाद हो रही है।
इसके बाद अगस्त 2026 में जांच एजेंसी ने पूर्व मंत्री कारुमूरी वेंकट नागेश्वर राव को भी गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि उन्होंने शराब परिवहन के उपठेकों में कुछ संबंधित व्यक्तियों और व्यावसायिक संस्थाओं को लाभ पहुंचाने में भूमिका निभाई।
हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और संबंधित व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
ईडी इस मामले में धन शोधन के संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताओं से अर्जित रकम का उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या इसे अलग-अलग कंपनियों या वित्तीय लेनदेन के माध्यम से छिपाने का प्रयास हुआ।
PMLA के तहत जांच में वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, व्यावसायिक समझौतों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऐसे मामलों में जांच एजेंसी संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाकर उपलब्ध दस्तावेजों और पूर्व में दर्ज बयानों के संबंध में स्पष्टीकरण मांग सकती है।
अंबाती रामबाबू को जारी समन इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। फिलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि पूछताछ के दौरान उनसे कौन-कौन से विशेष सवाल पूछे जाएंगे।
इस बीच, शराब घोटाले की जांच को लेकर आंध्र प्रदेश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी होते रहे हैं।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने पूर्व में इस मामले में हुई गिरफ्तारियों को लेकर आपत्ति जताई थी। पार्टी के कुछ नेताओं ने जांच के पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप लगाया था।
हालांकि, ईडी की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रही है और आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला न्यायालय को करना है।
अंबाती रामबाबू की प्रस्तावित पेशी को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें 4 नवंबर पर टिकी हैं।
यदि रामबाबू ईडी कार्यालय में पेश होते हैं, तो जांच एजेंसी उनके बयान को रिकॉर्ड कर सकती है और जरूरत पड़ने पर आगे भी स्पष्टीकरण मांग सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस पूछताछ के बाद एजेंसी की अगली कार्रवाई क्या होगी।
आंध्र प्रदेश के कथित शराब परिवहन घोटाले की जांच पहले ही कई प्रमुख राजनीतिक व्यक्तियों तक पहुंच चुकी है। अब पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू को समन जारी होने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर जांच की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।





