तेलंगाना

युवाओं की राजनीति में एंट्री आसान

Saba Naaz
26 July 2026 7:32 PM IST
युवाओं की राजनीति में एंट्री आसान
x

तेलंगाना: सरकार चुनावी राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा को 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित करने की योजना बना रही है। इसके लिए अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा और प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित कैंडल लाइट रैली को संबोधित करते हुए इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की लगभग 30 प्रतिशत आबादी युवा है, लेकिन संसद में युवाओं का प्रतिनिधित्व एक प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में राजनीतिक व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि 21 वर्ष की उम्र में युवा देश के भविष्य को तय करने वाले फैसलों में भागीदारी कर सकते हैं तो उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब युवाओं को नीति निर्माण और शासन व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों में युवाओं को कम उम्र में ही राजनीति में आने का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में कम उम्र के लोग प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे पदों तक पहुंच चुके हैं। वहीं सिंगापुर में 21 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बनने का प्रावधान है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दुनिया के अन्य देशों में युवाओं को नेतृत्व का मौका दिया जा सकता है तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।

वर्तमान में भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 25 वर्ष निर्धारित है। यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 84 और 173 के तहत लागू है। इसमें बदलाव के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी। तेलंगाना सरकार का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने के बाद इस पर अंतिम निर्णय संसद और केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बदलाव लागू होता है तो बड़ी संख्या में युवा चुनावी राजनीति में प्रवेश कर सकेंगे। इससे नई पीढ़ी के नेताओं को आगे आने का अवसर मिलेगा और राजनीतिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज मजबूत हो सकती है।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव लड़ने की उम्र कम करने के साथ युवाओं को राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक समझ और जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना भी जरूरी होगा। वहीं समर्थकों का तर्क है कि आज के युवा शिक्षा, तकनीक और सामाजिक मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक हैं, इसलिए उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

तेलंगाना सरकार का यह कदम युवाओं को राजनीति में अधिक अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजरें अगस्त में होने वाले विशेष विधानसभा सत्र और केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर टिकी हैं। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो देश

Next Story