
हैदराबाद: सितंबर 2024 से अब तक साइबर अपराधियों ने 735 डॉक्टरों से 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। इसे देखते हुए तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने मंगलवार को यहां मेडिकल कम्युनिटी के साथ साइबर जागरूकता पर एक हाई-लेवल मीटिंग की।
मीटिंग में TGCSB की डायरेक्टर शिखा गोयल ने तेज़ी से बदलते साइबर खतरों के बारे में बताया और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा, "आज साइबर अपराधी हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स समेत हर किसी को निशाना बना रहे हैं। ज़्यादा पढ़े-लिखे या प्रोफेशनल तौर पर सफल होने का मतलब यह नहीं है कि कोई साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित है। जागरूकता, सावधानी और समय पर रिपोर्टिंग ही हमारे सबसे मज़बूत बचाव हैं।"
इस बातचीत का मकसद डॉक्टरों के साथ सहयोग बढ़ाना, साइबर जागरूकता में सुधार करना और नए डिजिटल खतरों से बचने के लिए रणनीतियां बनाना था। इस सेशन में तेलंगाना के प्रमुख मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी, ट्रेज़रर और सीनियर पदाधिकारी समेत लगभग 72 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
अधिकारियों ने बताया कि सितंबर 2024 से तेलंगाना में कम से कम 735 डॉक्टर साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं और उन्हें कुल मिलाकर 29.88 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। धोखाधड़ी के मामलों में बिज़नेस और इन्वेस्टमेंट स्कैम से सबसे ज़्यादा आर्थिक नुकसान हुआ; 127 पीड़ितों को 22.39 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट), किसी और का रूप धरकर धोखाधड़ी (इम्पर्सनेशन फ्रॉड) और विज्ञापन से जुड़े स्कैम के मामलों में भी काफी नुकसान हुआ। डॉक्टरों के साथ हुए अन्य अपराधों में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, सेक्सटॉर्शन, इंश्योरेंस फ्रॉड, UPI स्कैम, मैट्रिमोनियल फ्रॉड और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी धोखाधड़ी शामिल हैं।
अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि पढ़ाई-लिखाई या प्रोफेशनल सफलता साइबर अपराध से सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। उन्होंने चेतावनी दी कि बहुत ज़्यादा क्वालिफाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स भी अब सोफिस्टिकेटेड स्कैम (जटिल धोखाधड़ी) के आसान शिकार बन रहे हैं। ब्यूरो ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में 'गोल्डन आवर' के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के ज़रिए तुरंत रिपोर्ट करने से धोखाधड़ी वाले ट्रांज़ैक्शन को फ्रीज़ करने और चोरी हुए पैसे वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
प्रमुख मेडिकल संस्थाओं के प्रतिनिधियों - जिनमें पीडियाट्रिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, डेंटिस्ट, ऑर्थोपेडिक सर्जन, गायनेकोलॉजिस्ट और अस्पतालों के एसोसिएशन शामिल हैं - ने चर्चा में हिस्सा लिया। वे डॉक्टरों के बीच डिजिटल सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए अस्पतालों, क्लीनिकों, कॉन्फ्रेंस और मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम के ज़रिए मिलकर साइबर जागरूकता फैलाने पर सहमत हुए।





