तेलंगाना

खड़गे के बयान पर डीके अरुणा का पलटवार माफी की मांग

Ratna Netam
4 Oct 2026 6:56 PM IST
खड़गे के बयान पर डीके अरुणा का पलटवार माफी की मांग
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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सांसद डीके अरुणा ने रविवार को खड़गे के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी पार्टी के भीतर की कार्यप्रणाली पर गौर करना चाहिए। उन्होंने खड़गे से अपनी टिप्पणी पर दोबारा विचार करने और बयान के लिए माफी मांगने की मांग की।डीके अरुणा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करते समय राजनीतिक नेताओं को अपनी पार्टी के इतिहास और आंतरिक व्यवस्था को भी देखना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों का उल्लेख करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
अरुणा ने कहा कि जब खड़गे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC के अध्यक्ष बने थे, उस समय कांग्रेस के ही कुछ सदस्यों ने चुनाव में शामिल डेलीगेट्स की पूरी सूची उपलब्ध कराने की मांग की थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेतृत्व ने वास्तव में उस सूची को पूरी तरह उपलब्ध कराया था।उन्होंने कहा, “AICC अध्यक्ष बनने के बाद उनकी अपनी पार्टी के सदस्यों ने चुनाव के लिए डेलीगेट्स की पूरी सूची मांगी थी। क्या उन्होंने सच में वह सूची दी थी?” अरुणा ने इसी आधार पर कांग्रेस अध्यक्ष के चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर दिए जा रहे बयानों पर सवाल उठाया।
डीके अरुणा ने कांग्रेस के पुराने नेतृत्व का जिक्र करते हुए जवाहरलाल नेहरू, मनमोहन सिंह और राजीव गांधी का नाम भी लिया। उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं के चयन की प्रक्रिया भी उस तरह के प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए नहीं हुई थी, जिस तरह की चुनाव प्रक्रिया को लेकर अब कांग्रेस की ओर से बातें कही जा रही हैं।अरुणा का कहना था कि कांग्रेस को चुनाव आयोग या उसके अधिकारियों पर टिप्पणी करने से पहले अपने संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने खड़गे की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए कहा कि उन्हें अपने बयान पर विचार करना चाहिए।
सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पद को लेकर होने वाली राजनीतिक बयानबाजी पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते समय राजनीतिक दलों को तथ्यों और अपनी जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने खड़गे से अपने बयान को लेकर माफी मांगने की मांग दोहराई।डीके अरुणा का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस चल रही है। विपक्ष की ओर से समय-समय पर चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष के नेता इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल खड़े करने का आरोप लगाते रहे हैं।
इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी है। अरुणा ने इसी टिप्पणी को आधार बनाकर कांग्रेस के आंतरिक चुनाव और उसके पुराने नेतृत्व की चयन प्रक्रिया को बहस में ला दिया है। इससे यह राजनीतिक विवाद केवल चुनाव आयोग तक सीमित न रहकर कांग्रेस के संगठनात्मक लोकतंत्र तक पहुंच गया है।अरुणा ने कांग्रेस नेतृत्व से यह स्पष्ट करने की मांग की कि पार्टी के अंदर चुनावी प्रक्रियाओं में कितनी पारदर्शिता बरती जाती है। उन्होंने कहा कि दूसरों की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाले दल को पहले अपने संगठन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को भी सार्वजनिक कसौटी पर देखना चाहिए।
मल्लिकार्जुन खड़गे अक्टूबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए थे। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में उनके सामने शशि थरूर उम्मीदवार थे। उस समय भी मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर पार्टी के भीतर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब डीके अरुणा ने उसी संदर्भ को उठाते हुए खड़गे की मौजूदा टिप्पणी पर पलटवार किया है।अरुणा की टिप्पणी के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी सियासी बहस में कांग्रेस के आंतरिक चुनाव का मुद्दा भी शामिल हो गया है। राजनीतिक रूप से देखा जाए तो भाजपा नेता इस मुद्दे के जरिए कांग्रेस के आरोपों का जवाब उसके संगठनात्मक ढांचे और इतिहास के उदाहरणों से देने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि अरुणा की ओर से कांग्रेस की आंतरिक व्यवस्था और पूर्व नेताओं को लेकर किए गए दावे उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन दावों और कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी को अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के नजरिए से देखा जाना जरूरी है।चुनाव आयोग भारत की संवैधानिक संस्था है और चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में आयोग के कामकाज और फैसलों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बहस अक्सर संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन जाती है। विपक्ष जहां चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल उठाता है, वहीं सत्ता पक्ष ऐसे आरोपों को लेकर विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
डीके अरुणा ने अपने बयान के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष पर सीधा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि खड़गे को पहले अपनी पार्टी की चुनाव प्रक्रिया और उसके इतिहास को देखना चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर उनसे अपनी टिप्पणी पर पुनर्विचार करने और माफी मांगने को कहा।इस बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है। अब कांग्रेस की ओर से डीके अरुणा के आरोपों और माफी की मांग पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।
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