तेलंगाना

DGP का बड़ा खुलासा साइबर ठगी से तेलंगाना में ₹1700 करोड़ का नुकसान

nidhi
10 Aug 2026 3:11 PM IST
DGP का बड़ा खुलासा साइबर ठगी से तेलंगाना में ₹1700 करोड़ का नुकसान
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तीन साल में साइबर अपराध से ₹1700 करोड़ गंवाए तेलंगाना के लोग
तेलंगाना : साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने पुलिस और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के DGP के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में साइबर क्राइम के कारण करीब ₹1,700 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा बताता है कि ऑनलाइन ठगी और डिजिटल फ्रॉड अब लोगों और कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, लोन ऐप, फर्जी कस्टमर केयर और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
तीन साल में ₹1,700 करोड़ का नुकसान
तेलंगाना पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, तीन वर्षों के दौरान साइबर अपराध से जुड़ी घटनाओं में लोगों को लगभग ₹1,700 करोड़ की आर्थिक क्षति हुई। इतनी बड़ी रकम का नुकसान यह दिखाता है कि साइबर ठगी अब केवल छोटे-मोटे ऑनलाइन फ्रॉड तक सीमित नहीं रही।
साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल करके पीड़ितों तक पहुंचते हैं और कई बार कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते से बड़ी रकम निकाल लेते हैं। ठगी के बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों में तेजी से ट्रांसफर किए जाने के कारण उसे वापस हासिल करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी के मामले
हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के मामले चर्चा में रहे हैं। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, NIA या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर निगरानी या पूछताछ का झांसा देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।
इसी तरह फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोगों को बड़े मुनाफे का लालच दिया जाता है। शुरुआत में पीड़ित को छोटे निवेश पर लाभ दिखाया जाता है और भरोसा बनने के बाद उससे बड़ी रकम जमा कराई जाती है।
साइबर अपराधियों के नए तरीके
साइबर ठगी में फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट, OTP हासिल करना, SIM से जुड़ी धोखाधड़ी और सोशल मीडिया प्रोफाइल का इस्तेमाल भी किया जाता है।
अपराधी कई बार बैंक या सरकारी विभाग के नाम से संदेश भेजते हैं और लोगों से लिंक पर क्लिक करने या निजी जानकारी साझा करने के लिए कहते हैं। इसके बाद बैंकिंग या अन्य संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग किया जा सकता है।
पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
साइबर अपराध में अपराधी अक्सर अलग-अलग राज्यों या देशों से काम करते हैं। ठगी की रकम भी कई खातों में तेजी से ट्रांसफर की जाती है। इससे पुलिस के लिए अपराधियों की पहचान और रकम की रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
ऐसे मामलों में पुलिस को बैंक, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय करना पड़ता है। समय पर शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को फ्रीज करने की संभावना बढ़ सकती है।
आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को अनजान कॉल, SMS, ई-मेल और सोशल मीडिया संदेशों पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। OTP, PIN, CVV, बैंक पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर फोन पर पैसे मांगता है, तो पहले उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर करना जोखिम भरा हो सकता है।
समय पर शिकायत करना बेहद जरूरी
अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे तुरंत बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था को सूचित करना चाहिए और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करनी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतनी ही जल्दी संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना रहती है।
साइबर अपराध से होने वाला ₹1,700 करोड़ का नुकसान तेलंगाना में डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती को दर्शाता है। पुलिस के साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता भी इस तरह की ठगी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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