तेलंगाना
बिना अनुमति डॉक्यूमेंट्री दिखाने का आरोपNALSAR VC से कार्रवाई की मांग
Ratna Netam
25 Sept 2026 7:06 PM IST

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हैदराबाद। NALSAR के कुलपति ने कहा है कि विश्वविद्यालय ने इस स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दी थी। फिल्म को CBFC प्रमाणन भी नहीं मिला है; CBFC ने इससे पहले कहा था कि बिना प्रमाणन किसी फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन, विशेष छूट न होने पर, सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन होगा। हालांकि NALSAR की स्क्रीनिंग को छात्रों ने निजी और केवल छात्रों तक सीमित कार्यक्रम बताया है।हैदराबाद। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में जेल में बंद एक्टिविस्ट और पूर्व JNU छात्र उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Prisoner No. 626710 is Present’ की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की तेलंगाना इकाई ने विश्वविद्यालय परिसर में हुई स्क्रीनिंग का विरोध करते हुए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्क्रीनिंग आयोजित करने वाले छात्रों ने इसे एक निजी और केवल छात्रों के लिए आयोजित कार्यक्रम बताया है।
यह स्क्रीनिंग बुधवार, 23 सितंबर की शाम NALSAR परिसर में छात्रों के एक समूह ने आयोजित की थी। फिल्म निर्माता ललित वचानी द्वारा निर्देशित यह डॉक्यूमेंट्री उमर खालिद के छात्र कार्यकर्ता के रूप में सफर, 2020 में उनकी गिरफ्तारी और उसके बाद से जेल में रहने पर केंद्रित है। छात्रों की ओर से इसे ‘सॉलिडैरिटी स्क्रीनिंग’ बताया गया।ABVP तेलंगाना ने इस आयोजन पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि स्क्रीनिंग के लिए NALSAR प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने और आयोजन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। ABVP के जॉइंट सेक्रेटरी राजू ने भी स्क्रीनिंग का विरोध करते हुए कुलपति से कार्रवाई की मांग की।
इस बीच NALSAR के कुलपति प्रोफेसर श्रीकृष्ण देवा राव ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय ने ‘Prisoner No. 626710’ की स्क्रीनिंग को अधिकृत नहीं किया था और विश्वविद्यालय के किसी भी प्राधिकरण ने इसके लिए आधिकारिक अनुमति नहीं दी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक मंजूरी से आयोजित नहीं किया गया था।हालांकि कार्यक्रम आयोजित करने वाले छात्रों का पक्ष अलग है। छात्रों ने इसे निजी कार्यक्रम बताया, जिसमें प्रवेश केवल विद्यार्थियों तक सीमित था। आयोजकों का कहना था कि स्क्रीनिंग का उद्देश्य फिल्म में उठाए गए अधिकार, जवाबदेही और लंबे समय तक विचाराधीन कैद से जुड़े सवालों पर चर्चा करना था। स्क्रीनिंग के बाद इन विषयों पर छात्रों के बीच बातचीत भी हुई।
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू फिल्म का प्रमाणन भी है। ‘Prisoner No. 626710 is Present’ को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र नहीं मिला है। CBFC इससे पहले IIIT हैदराबाद में प्रस्तावित इसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के संदर्भ में कह चुका है कि बिना प्रमाणन वाली फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन होगा, जब तक कि उसके लिए विशेष छूट प्राप्त न की गई हो।हालांकि NALSAR में कार्यक्रम को आयोजकों ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग के बजाय केवल छात्रों के लिए निजी आयोजन बताया है। ऐसे में इस आयोजन पर प्रमाणन संबंधी कानूनी प्रावधान किस तरह लागू होते हैं, यह संबंधित तथ्यों और कानून की व्याख्या पर निर्भर करेगा।
NALSAR में हुई स्क्रीनिंग से पहले यही डॉक्यूमेंट्री दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में भी विवाद का विषय बन चुकी है। IIIT हैदराबाद में 18 सितंबर को इसकी स्क्रीनिंग प्रस्तावित थी। CBFC की आपत्ति के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। IIIT हैदराबाद ने उस समय कहा था कि प्रस्तावित कार्यक्रम संस्थान की ओर से आयोजित या अधिकृत नहीं था और इसके लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में भी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग पहले स्थगित और बाद में रद्द कर दी गई थी। ABVP ने वहां भी इसका विरोध किया था और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी।
इन घटनाओं के बाद NALSAR के छात्रों द्वारा डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने से यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। स्क्रीनिंग में शामिल छात्रों का कहना है कि फिल्म लंबे समय तक जेल में रहने वाले विचाराधीन कैदियों, आपराधिक न्याय प्रक्रिया और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े सवाल उठाती है। यह छात्रों और फिल्म निर्माताओं का दृष्टिकोण है और इसे अदालत की ओर से उमर खालिद के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले पर किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। वह फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA सहित अन्य धाराओं के तहत मामला चल रहा है। अभियोजन पक्ष ने उन पर दंगों की कथित साजिश में भूमिका का आरोप लगाया है। खालिद इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और मामला न्यायिक प्रक्रिया में है।फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस हिंसा से संबंधित कई अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उमर खालिद जिस मामले में आरोपी हैं, वह दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कथित बड़ी साजिश से संबंधित UAPA मामला है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
NALSAR का ताजा विवाद अब विश्वविद्यालय परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति और अभिव्यक्ति से जुड़े सवालों के साथ फिल्म प्रमाणन के मुद्दे को भी सामने लाया है। एक तरफ ABVP स्क्रीनिंग का विरोध करते हुए कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं इसे आयोजित करने वाले छात्रों ने कार्यक्रम को अधिकारों और न्याय प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का माध्यम बताया है।फिलहाल NALSAR प्रशासन ने इतना स्पष्ट किया है कि स्क्रीनिंग को विश्वविद्यालय की आधिकारिक अनुमति नहीं मिली थी। ABVP की कार्रवाई की मांग पर विश्वविद्यालय की ओर से किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए आगे विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर नजर रहेगी।
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