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हैदराबाद। मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान जानबूझकर गलत जानकारी या घोषणा देने वाले आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि फॉर्म 6, 6A, 7 और 8 में जानबूझकर गलत बयान या घोषणाएं करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई शुरू की जाए।मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस संबंध में ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) के कमिश्नर और हैदराबाद के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के साथ-साथ राज्य के सभी जिला कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखा है। इसमें मतदाता सूची से जुड़े आवेदनों की गंभीरता से जांच करने और जानबूझकर गलत घोषणा करने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब CEO कार्यालय को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के सामने फॉर्म 7 के जरिए बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल किए जाने की जानकारी मिली है। आधिकारिक बयान के अनुसार, इनमें से कुछ आवेदनों के वास्तविक नहीं होने की आशंका जताई गई है। इसी के बाद निर्वाचन अधिकारियों को आवेदन और उनमें दी गई जानकारी की जांच को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है।
फॉर्म 7 के आवेदनों पर विशेष नजर
मतदाता सूची की प्रक्रिया में अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित हैं। फॉर्म 6 का इस्तेमाल आम तौर पर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के आवेदन के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म 6A विदेश में रहने वाले पात्र भारतीय मतदाताओं से संबंधित है। फॉर्म 7 का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति या मौजूदा नाम को हटाने से जुड़े अनुरोध के लिए किया जाता है। वहीं फॉर्म 8 मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधार या उससे संबंधित निर्धारित बदलावों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।मौजूदा मामले में फॉर्म 7 के जरिए बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद अधिकारियों का ध्यान इस तरफ गया है। कुछ आवेदनों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल सामने आने के बाद CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया कि गलत घोषणाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या विवरण में बदलाव की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल न हो।
जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कार्रवाई
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी कलेक्टरों और DEO को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि अगर जांच में कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करने के लिए जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस निर्देश में विशेष रूप से फॉर्म 6, 6A, 7 और 8 का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों से कहा गया है कि आवेदनों की जांच करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि दी गई जानकारी सही है और आवेदन वास्तविक आधार पर किया गया है।इस प्रक्रिया में वास्तविक और वैध आवेदन करने वाले लोगों तथा जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण होगा। किसी आवेदन पर संदेह होने की स्थिति में उसकी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाएगी और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मतदाता सूची की शुद्धता पर जोर
विशेष गहन संशोधन का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिरहित बनाना है। ऐसे में गलत जानकारी के आधार पर किए गए आवेदन मतदाता सूची की शुद्धता को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण निर्वाचन अधिकारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। पात्र मतदाताओं का नाम सूची में शामिल होना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों का नियमानुसार समाधान किया जाना आवश्यक है। इसके लिए आवेदन और आपत्तियों की जांच भी महत्वपूर्ण होती है।CEO कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों के बाद जिला स्तर पर निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें बड़ी संख्या में आने वाले आवेदनों की जांच के साथ यह भी देखना होगा कि किसी व्यक्ति की ओर से जानबूझकर गलत घोषणा तो नहीं की गई है।
फर्जी या गैर-वास्तविक आवेदन रोकने की कोशिश
फॉर्म 7 को लेकर सामने आई जानकारी ने अधिकारियों की चिंता बढ़ाई है। इस फॉर्म के जरिए मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति या नाम हटाने से जुड़ा अनुरोध किया जा सकता है। ऐसे में अगर गैर-वास्तविक या गलत आधार पर आवेदन दाखिल किए जाते हैं तो इससे संबंधित मतदाता के लिए परेशानी पैदा हो सकती है।इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को आवेदनों की जांच में सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने जैसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन और तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश
CEO की ओर से जारी पत्र केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं है। GHMC कमिश्नर और हैदराबाद DEO के अलावा राज्य के सभी कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश भेजे गए हैं। इससे स्पष्ट है कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान गलत घोषणाओं को रोकने के लिए राज्य स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे प्राप्त आवेदनों की जांच करते समय नियमों का पालन करें और जानबूझकर गलत जानकारी देने के मामले सामने आने पर कार्रवाई करें।फिलहाल CEO कार्यालय को फॉर्म 7 में बड़ी संख्या में आवेदन मिलने और उनमें से कुछ के वास्तविक नहीं होने की आशंका की जानकारी मिली है। इन आवेदनों की जांच के बाद ही संबंधित मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश के बाद अब विशेष गहन संशोधन के दौरान दाखिल किए जा रहे फॉर्म 6, 6A, 7 और 8 पर अधिकारियों की निगरानी और बढ़ने की संभावना है। इसका प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखना और जानबूझकर गलत जानकारी देकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
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