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New Delhi नई दिल्ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 2015 के कैश-फॉर-वोट मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा लगाया गया जाल “पूरी तरह अवैध” था, क्योंकि इसे बिना किसी एफआईआर दर्ज किए अंजाम दिया गया। 31 मई, 2015 को, कांग्रेस नेता रेवंत रेड्डी, जो उस समय तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सदस्य थे, को कथित रूप से 50 लाख रुपये रिश्वत देते हुए ACB ने पकड़ा था। यह रिश्वत कथित तौर पर नॉमिनेटेड विधायक एल्विस स्टीफेंसन को दी जा रही थी ताकि वे TDP उम्मीदवार वेम नरेंद्र रेड्डी का समर्थन करें। यह घटना तेलंगाना विधान परिषद चुनाव के दौरान हुई थी।
रेवंत रेड्डी ने कोर्ट में दावा किया कि ACB ने बिना कानूनी प्रक्रिया और एफआईआर के जाल लगाया, जो न्यायिक और संवैधानिक नियमों के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उनके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और उन्हें फंसाने के उद्देश्य से की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से कहा गया कि इस मामले में तत्कालीन कार्रवाई और सबूतों का संग्रह न्याय संगत नहीं था, और उन्हें न्यायिक सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। यह मामला राजनीतिक और विधायी विवादों के बीच फंसा हुआ माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रेवंत रेड्डी का यह दावा एंटी करप्शन जांचों की प्रक्रिया और वैधता पर सवाल उठाता है। यदि कोर्ट उनके पक्ष में निर्णय देता है, तो यह तेलंगाना के राजनीतिक परिदृश्य और न्यायिक जांच की सीमाओं पर भी असर डाल सकता है। इस मामले की सुनवाई अब आगे की तारीखों में जारी रहेगी, जिसमें ACB और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला राजनीतिक विवादों और विधायी चुनाव प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के महत्व को भी उजागर करता है।
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