
सिकंदराबाद। बोलारम इलाके में इंडियन आर्मी रेजिमेंट की एक बटालियन से हथियार गायब होने के मामले की जांच के बीच गुरुवार को एक और चौंकाने वाली बरामदगी सामने आई। इलाके में तलाशी अभियान चला रही टीमों को फायरिंग रेंज के पास एक बाल्टी में बड़ी संख्या में डेटोनेटर मिले हैं। इस बरामदगी के बाद गायब हथियारों से जुड़े मामले का रहस्य और गहरा गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि डेटोनेटर वहां कैसे पहुंचे और उनका गायब हथियारों के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
मलकाजगिरी पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हथियारों के गायब होने की जांच के तहत इलाके में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सर्च टीम फायरिंग रेंज के आसपास पहुंची। फायरिंग रेंज की बाउंड्री वॉल के पास एक संदिग्ध बाल्टी दिखाई दी। जांच करने पर उसके अंदर डेटोनेटर के कई बंडल मिले।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाल्टी से कम से कम 160 डेटोनेटर बरामद किए गए हैं। इन्हें 20-20 डेटोनेटर के बंडल में रखा गया था। इतनी बड़ी संख्या में डेटोनेटर एक साथ मिलने के बाद पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियां सतर्क हो गईं। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे इलाके की बारीकी से जांच की जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि डेटोनेटर आखिर फायरिंग रेंज की बाउंड्री वॉल के पास किसने रखे। क्या इन्हें किसी ने जानबूझकर यहां छिपाया था या किसी अन्य कारण से ये इस स्थान तक पहुंचे, इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल जांच एजेंसियों की ओर से दोनों घटनाओं के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बोलारम का इलाका सैन्य गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बड़ी संख्या में डेटोनेटर मिलने से सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डेटोनेटर की उत्पत्ति और उनके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
जांच के दौरान यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि बरामद डेटोनेटर किस प्रकार के हैं और उनका इस्तेमाल आमतौर पर किन गतिविधियों में किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा सकती है। डेटोनेटर पर मौजूद पहचान संबंधी निशान, बैच नंबर या अन्य तकनीकी विवरण जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इससे पहले इंडियन आर्मी रेजिमेंट की बटालियन से हथियार गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई थी। हथियार कहां गए, किस परिस्थिति में गायब हुए और इसके पीछे किसकी भूमिका हो सकती है, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए व्यापक जांच शुरू की गई। इसी सिलसिले में आसपास के क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
गुरुवार को हुई डेटोनेटर की बरामदगी ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। अब जांच एजेंसियों के सामने हथियारों की तलाश के साथ डेटोनेटर की मौजूदगी का रहस्य सुलझाने की भी चुनौती है। इस बात की जांच की जा रही है कि क्या डेटोनेटर लंबे समय से वहां रखे थे या हाल ही में उन्हें वहां छोड़ा गया।
फायरिंग रेंज की बाउंड्री वॉल के पास डेटोनेटर मिलने के कारण आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सर्च टीमों द्वारा अन्य संदिग्ध वस्तुओं की तलाश भी की जा सकती है। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि इलाके में कोई अन्य विस्फोटक सामग्री या गायब हथियार मौजूद न हों।
पुलिस आसपास की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटा सकती है। फायरिंग रेंज के आसपास कौन-कौन आता-जाता है और संदिग्ध बाल्टी कब से वहां मौजूद थी, जैसे सवाल जांच के केंद्र में रह सकते हैं। आसपास निगरानी कैमरे उपलब्ध होने की स्थिति में उनके फुटेज भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इसके अलावा सैन्य परिसर और उससे जुड़े क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों से भी जानकारी ली जा सकती है। हथियारों के रिकॉर्ड और भंडारण व्यवस्था की जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि गायब हथियार आखिरी बार कब और किसके पास दर्ज किए गए थे।
इस पूरे मामले में हथियारों की संख्या और उनकी प्रकृति से संबंधित विस्तृत जानकारी भी जांच के लिए महत्वपूर्ण होगी। हथियार सैन्य परिसर के भीतर से किस तरह गायब हुए, इस सवाल का जवाब सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक का पता लगाने में मदद कर सकता है।
डेटोनेटर मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। पुलिस और सैन्य अधिकारियों के बीच समन्वय के साथ जांच आगे बढ़ाई जा सकती है। फॉरेंसिक और विस्फोटक विशेषज्ञ भी बरामद सामग्री की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि डेटोनेटर कहां से आए और वे किस अवधि के हैं।
बरामद डेटोनेटर को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लेकर उनकी तकनीकी जांच कराए जाने की संभावना है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या इनका संबंध किसी सैन्य स्टॉक से है या ये किसी अन्य स्रोत से वहां पहुंचे थे। यह तथ्य पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।
फिलहाल डेटोनेटर की बरामदगी और गायब हथियारों के मामले के बीच संबंध स्थापित नहीं हुआ है। ऐसे में दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर आगे बढ़ रही हैं।
संवेदनशील सैन्य क्षेत्र से जुड़े इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता गायब हथियारों को तलाशने के साथ यह सुनिश्चित करना भी है कि वे किसी गलत हाथ में न पहुंचे हों। इसके लिए इलाके में तलाशी और जांच का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
गुरुवार को फायरिंग रेंज के पास बाल्टी में मिले कम से कम 160 डेटोनेटर ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब जांच का फोकस इस बात पर भी रहेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में डेटोनेटर वहां किसने रखे और इसके पीछे क्या उद्देश्य था। विस्तृत जांच के बाद ही हथियारों की गुमशुदगी और डेटोनेटर की बरामदगी से जुड़े सवालों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।





