
हैदराबाद: तेलंगाना में अधिक टैक्स के कारण प्राइवेट ट्रांसपोर्ट और टूरिस्ट बस ऑपरेटर अपने वाहनों को दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रजिस्टर करवा रहे हैं, जहाँ टैक्स का बोझ काफी कम है। यह चलन विशेष रूप से दशहरा त्योहार की भीड़ के दौरान देखने को मिला, जब शहर में चलने वाली अधिकांश प्राइवेट और टूरिस्ट बसें तेलंगाना के बाहर रजिस्टर्ड पाई गईं।
खबरों के अनुसार, तेलंगाना में लगने वाले सालाना मोटर वाहन टैक्स और तिमाही टैक्स की वजह से ट्रांसपोर्ट एजेंसियां अपनी 'कॉन्ट्रैक्ट कैरिज' बसों को दूसरे राज्यों, खासकर कम टैक्स वसूलने वाले केंद्र शासित प्रदेशों में खरीद और रजिस्टर करवा रही हैं।
हैदराबाद से दूसरे जिलों और राज्यों के लिए चलने वाली बसों पर नागालैंड (NL), ओडिशा (OD), अरुणाचल प्रदेश (AR) और पुडुचेरी (PY) जैसे स्थानों के रजिस्ट्रेशन नंबर देखे गए।
ट्रांसपोर्ट एजेंसियों के मुताबिक, ऑपरेटर अपना वित्तीय बोझ कम करने के लिए इन जगहों को चुन रहे हैं। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, वे इन बसों को तेलंगाना लाते हैं और 'ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट' (AITP) के तहत चलाते हैं।
एक ट्रांसपोर्ट एजेंसी के प्रतिनिधि ने बताया, "तेलंगाना में टैक्स और फीस ऑपरेटरों पर एक बड़ा वित्तीय बोझ हैं। दूसरे राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में बसें रजिस्टर कराने से यह बोझ कम हो जाता है। अगर सरकार टैक्स का ढांचा सस्ता कर दे, तो हम अपने वाहनों को तेलंगाना में ही रजिस्टर कराना पसंद करेंगे।"
एक अन्य ट्रांसपोर्ट प्रतिनिधि ने कहा कि दूसरे राज्यों में बसें खरीदना उनकी पहली पसंद नहीं है, लेकिन परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) एक बड़ी चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर टैक्स का बोझ कम हो जाए, तो ऑपरेटर तेलंगाना में और अधिक बसें रजिस्टर कराने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर को राहत मिलेगी।





