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हैदराबाद: वरिष्ठ BRS नेताओं ने जूबिली हिल्स उपचुनाव के दौरान कांग्रेस सरकार के मीडिया डायरेक्टर श्रीराम कर्री के खिलाफ चुनाव आयोग और टेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। BRS नेताओं ने कर्री पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन किया और सार्वजनिक पद का दुरुपयोग करते हुए कांग्रेस और उसके उम्मीदवार का प्रचार किया। BRS के वरिष्ठ नेता चिरुमिला राकेश कुमार, K. वासुदेव रेड्डी, और K. सैदी रेड्डी ने आरोप लगाया कि श्रीराम कर्री, जो एक सार्वजनिक पदाधिकारी हैं, ने अपने वेरिफाइड X (पूर्व Twitter) हैंडल के माध्यम से खुले तौर पर कांग्रेस और उसके उम्मीदवार का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि MCC की धारा के अनुसार, सभी सरकारी अधिकारी राजनीतिक तटस्थता बनाए रखें और किसी भी राजनीतिक प्रचार या समर्थन से बचें।
BRS नेताओं ने कहा कि कर्री का यह कृत्य न केवल सरकारी पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि इससे चुनावी निष्पक्षता भी प्रभावित हुई है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि कर्री के खिलाफ तत्काल जांच की जाए, उन्हें जांच के दौरान उनके पद से निलंबित किया जाए और उनके सोशल मीडिया रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएँ। शिकायत में नेताओं ने यह भी जोर दिया कि कर्री का कृत्य संस्थागत विश्वास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी यदि राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होंगे, तो चुनाव समान अवसर और निष्पक्षता की दृष्टि से प्रभावित होंगे। BRS नेताओं ने चुनाव आयोग से अपील की कि ऐसे मामलों से बचने के लिए सरकारी अधिकारियों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने के लिए नया निर्देश जारी किया जाए।
BRS नेताओं का आरोप है कि श्रीराम कर्री ने अपने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग करते हुए कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार का प्रचार किया, जो MCC के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह न केवल राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करता है, बल्कि आम जनता में यह संदेश भी जाता है कि सरकारी मशीनरी किसी विशेष पार्टी के पक्ष में कार्य कर सकती है। इस मामले ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव अधिकारी की सक्रिय निगरानी की आवश्यकता को भी उजागर किया है। BRS नेताओं ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए सख्त नियम और दिशानिर्देश बनाए जाएँ। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दुरुपयोग या पक्षपात अनुचित और गैरकानूनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अधिकारियों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। MCC का उल्लंघन न केवल आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि यह चुनाव की भरोसेमंद और निष्पक्ष प्रकृति को भी कमजोर करता है।
BRS नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाएंगे और चुनाव आयोग से मांग करेंगे कि सभी सरकारी अधिकारियों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने के लिए स्थायी निर्देश और नियमावली जारी की जाए। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह के पक्षपात और अनुचित दबाव से बचा जा सकेगा। कुल मिलाकर, यह मामला टेलंगाना के जूबिली हिल्स बायपोल और राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना बन गया है। BRS नेताओं की शिकायत ने चुनाव आयोग के सामने सरकारी पदाधिकारियों की तटस्थता और चुनावी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की चुनौती रखी है। इस मामले की जांच और आगामी कार्रवाई पर राजनीतिक और प्रशासनिक नजरें टिकी हुई हैं।
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