तेलंगाना

BRS ने की चुनाव आयोग से स्थगन की मांग

SHIDDHANT
28 Aug 2025 8:41 PM IST
BRS ने की चुनाव आयोग से स्थगन की मांग
x

TELANGANA तेलंगाना : इस समय भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। ऐसे में भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने ग्राम पंचायत मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की है। बीआरएस नेताओं का कहना है कि जब लोग अपने परिवार, फसल और मवेशियों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं, तब चुनावी औपचारिकताओं को पूरा करने की उम्मीद करना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि अमानवीय भी है। बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (KTR), विधान परिषद सदस्य एल. रमणा और दासोजु श्रीवन ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारी बारिश से मेदक, संगारेड्डी, सिद्धिपेट, कामारेड्डी, निजामाबाद, मुलुगु और भद्राद्री कोठागुडेम जैसे जिलों में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नेताओं ने पत्र में उल्लेख किया कि लाखों एकड़ धान, कपास और मक्का की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हजारों मवेशियों, बकरियों और भेड़ों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसान गहरे संकट में हैं। वहीं सड़कें, बिजली आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था और कोयला खदानें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को झटका दिया है बल्कि लाखों लोगों के जीवन को असुरक्षित कर दिया है।

बीआरएस नेताओं ने राज्य चुनाव आयोग के हालिया नोटिफिकेशन (नं. 548/TGSEC-PR/2025) की आलोचना करते हुए कहा कि केवल पांच दिन (28 अगस्त से 2 सितंबर) की समयसीमा में मतदाता सूची संशोधन कराना व्यावहारिक नहीं है। खासकर तब, जब मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। नेताओं का कहना है कि जिन नागरिकों के घर बाढ़ में डूब गए हैं, जिनके पास खाने और पीने तक की समस्या है, उनसे मतदाता सूची की औपचारिकताओं में भागीदारी की उम्मीद करना अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लाखों किसान अपनी फसलों और परिवारों को बचाने में व्यस्त हैं, तब वे चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हिस्सा कैसे बन सकते हैं? बीआरएस नेताओं ने निर्वाचन आयोग से अपील की कि वह मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को तुरंत स्थगित करे और इसे तब तक के लिए टाले, जब तक कि स्थिति सामान्य न हो जाए।

बीआरएस ने यह भी कहा कि लोकतंत्र का मूल आधार जनता की भागीदारी है। यदि बाढ़ग्रस्त जिलों के लोग इस प्रक्रिया से वंचित हो जाते हैं तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी संस्था होने के नाते चुनाव आयोग को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और नागरिकों को और अधिक कष्ट में नहीं डालना चाहिए। तेलंगाना राज्य चुनाव आयोग की ओर से अभी तक बीआरएस की इस अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दल भी आयोग से इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग कर रहे हैं। कुल मिलाकर, जब राज्य के लाखों लोग बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं, तब बीआरएस ने मतदाता सूची संशोधन को स्थगित करने की जो मांग उठाई है, उसने न केवल राजनीतिक बहस को जन्म दिया है बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं जनता की पीड़ा को दरकिनार कर चलाई जा सकती हैं?

Next Story