तेलंगाना

हथियार फैक्ट्री में सेंध AK 203 राइफलें चोरी होने से मचा हड़कंप

Ratna Netam
12 Sept 2026 2:58 PM IST
हथियार फैक्ट्री में सेंध AK 203 राइफलें चोरी होने से मचा हड़कंप
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हैदराबाद। तेलंगाना के सिकंदराबाद कैंटोनमेंट में भारतीय सेना के एक सुरक्षित हथियार भंडार से अत्याधुनिक AK-203 असॉल्ट राइफल समेत बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद चोरी होने के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में इस वारदात के पीछे किसी बाहरी गिरोह के बजाय सेना के ही एक पूर्व हवलदार की कथित भूमिका सामने आई है। पुलिस ने 37 वर्षीय पूर्व हवलदार उप्पुथल्ला मल्लेश को गिरफ्तार किया है। उसके पास से चोरी हुए हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं।
मामला इसलिए बेहद गंभीर था क्योंकि चोरी हुए हथियारों में चार AK-203 असॉल्ट राइफलें भी शामिल थीं। इसके अलावा एक INSAS राइफल और सात पिस्तौल चोरी हुई थीं। इतनी बड़ी मात्रा में सैन्य हथियार और गोलियां गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद सेना और तेलंगाना पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच शुरू की थी।
शुरुआत में इस बात की भी आशंका थी कि हथियार किसी आपराधिक नेटवर्क के हाथ न लग जाएं। हालांकि जांच आगे बढ़ी तो शक पूर्व सैन्यकर्मी पर गया और आखिरकार पुलिस ने आरोपी तक पहुंचकर हथियार बरामद कर लिए।
कौन निकला हथियार चोरी का मास्टरमाइंड?
तेलंगाना पुलिस के मुताबिक मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान उप्पुथल्ला मल्लेश के रूप में हुई है। मल्लेश भारतीय सेना की 20 मद्रास रेजिमेंट में हवलदार रह चुका था। उसने 2010 में सेना ज्वाइन की थी और करीब 16 साल तक सेवा की।
तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद के मुताबिक मल्लेश को अनुशासन और स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते 30 जून 2026 को समय से पहले सेवा से रिटायर कर दिया गया था। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि समय से पहले रिटायरमेंट को लेकर वह नाराज था और इसी नाराजगी ने कथित तौर पर वारदात की जमीन तैयार की।
हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि चोरी के पीछे वास्तविक मकसद की विस्तृत जांच अभी जारी है।
चार AK-203 समेत इतने हथियार हुए थे चोरी
इस चोरी में हथियारों की संख्या ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। पुलिस की बरामदगी के मुताबिक चार AK-203 असॉल्ट राइफल, एक INSAS राइफल और सात पिस्तौल चोरी की गई थीं। इनमें छह 9 एमएम पिस्तौल भी शामिल थीं।
इसके अलावा हथियारों की मैगजीन, नाइट-विजन उपकरण और बड़ी संख्या में गोलियां भी गायब थीं। पुलिस ने आरोपी के पास से 1,156 राउंड 9 एमएम गोला-बारूद और AK-203 की 720 गोलियां बरामद करने की जानकारी दी है।
सैन्य हथियारों के साथ इतनी बड़ी संख्या में कारतूस चोरी होने के कारण मामले को बेहद संवेदनशील माना गया।
30 और 31 अगस्त की रात हुई थी वारदात
यह चोरी 30 और 31 अगस्त की दरमियानी रात सिकंदराबाद के बोलारम इलाके में स्थित 20 मद्रास रेजिमेंट के स्टोरेज से हुई थी।
31 अगस्त को जब 'कोटे एंड बटालियन मैगजीन' यानी हथियार और गोला-बारूद रखने वाले हिस्से को खोला गया तो दरवाजों के ताले टूटे मिले। इसके बाद हथियारों और गोला-बारूद का मिलान किया गया और कई हथियार गायब पाए गए।
मामले की गंभीरता देखते हुए सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल की शिकायत पर बोलारम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच आगे बढ़ाई।
अंदर की जानकारी बनी जांच की अहम कड़ी
सिकंदराबाद कैंटोनमेंट का संबंधित हिस्सा उच्च सुरक्षा वाला सैन्य क्षेत्र है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि कोई व्यक्ति सुरक्षा व्यवस्था को पार कर हथियारों के स्टोरेज तक कैसे पहुंचा।
जांच के दौरान अधिकारियों ने उन लोगों पर खास ध्यान दिया जिन्हें सैन्य परिसर और हथियारों के स्टोरेज की व्यवस्था की जानकारी हो सकती थी।
पूर्व हवलदार होने के कारण मल्लेश सैन्य परिसर और उसकी व्यवस्थाओं से परिचित था। पुलिस जांच में उसकी गतिविधियों की पड़ताल की गई और धीरे-धीरे शक उसके आसपास केंद्रित होता गया।
शुरुआत में कई एंगल पर हुई जांच
अत्याधुनिक सैन्य हथियारों के गायब होने के बाद जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कहीं ये हथियार संगठित अपराधियों या दूसरे खतरनाक नेटवर्क तक तो नहीं पहुंच गए।
पुलिस ने अलग-अलग संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच की। सैन्य परिसर में तैनात और वहां पहुंच रखने वाले कर्मचारियों तथा पूर्व कर्मचारियों की गतिविधियों की पड़ताल की गई।
तकनीकी साक्ष्यों की जांच के साथ कई लोगों से पूछताछ की गई। चोरी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की भी पड़ताल शुरू हुई।
आरोपी के घर तक पहुंची पुलिस
जांच में मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस मल्लेश तक पहुंची। उसे नागरकुरनूल जिले के अचमपेट स्थित उसके आवास से पकड़ा गया।
सबसे बड़ी राहत तब मिली जब चोरी हुए सैन्य हथियार और गोला-बारूद बरामद हो गए। पुलिस के मुताबिक बरामद हथियार सुरक्षित मिले।
इससे वह बड़ी आशंका कम हुई कि चोरी किए गए हथियार किसी आपराधिक गिरोह या दूसरे नेटवर्क तक पहुंच चुके होंगे।
समय से पहले रिटायरमेंट से नाराजगी बनी वजह?
मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल चोरी के मकसद को लेकर है। पुलिस के शुरुआती आकलन के मुताबिक आरोपी समय से पहले सेना से रिटायर किए जाने से नाराज हो सकता था।
मल्लेश को जून 2026 में समय से पहले सेवा से हटाया गया था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इसी नाराजगी के चलते उसने बदला लेने के इरादे से हथियार चोरी किए।
हालांकि पुलिस अभी इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं मान रही है। डीजीपी ने कहा है कि मकसद की गहराई से जांच की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे बड़े सवाल
इस घटना ने सैन्य हथियारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार AK-203 जैसी आधुनिक असॉल्ट राइफल, INSAS राइफल, पिस्तौल और सैकड़ों कारतूस सुरक्षित सैन्य परिसर से बाहर कैसे पहुंचे, इसकी विस्तृत जांच जरूरी मानी जा रही है।
सेना ने घटना सामने आने के बाद हथियारों और गोला-बारूद के रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन किया। संबंधित परिसर और आसपास के हिस्सों की तलाशी लेने के साथ उन लोगों की पहचान की गई जिन्हें हथियार भंडारण क्षेत्र तक अधिकृत पहुंच हासिल थी।
हथियारों को जारी करने और वापस जमा करने से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की गई।
क्या आरोपी ने अकेले दिया वारदात को अंजाम?
पुलिस की प्रारंभिक जांच में मल्लेश को अकेला आरोपी बताया गया है। इसके बावजूद मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है।
इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद सैन्य परिसर से बाहर निकालना अपने आप में बड़ा सुरक्षा उल्लंघन है। इसलिए जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि आरोपी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी दूसरे व्यक्ति की मदद तो नहीं मिली।
आरोपी के संपर्कों और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों की पड़ताल भी मामले की पूरी तस्वीर साफ करने में महत्वपूर्ण होगी।
AK-203 के कारण और गंभीर हुआ मामला
AK-203 भारतीय सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण असॉल्ट राइफल है। यह 7.62x39 एमएम गोला-बारूद इस्तेमाल करती है। भारत में इन राइफलों का निर्माण भारत-रूस संयुक्त उपक्रम के तहत अमेठी के कोरवा में किया जा रहा है।
चार AK-203 का एक साथ सैन्य आर्मरी से गायब होना इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बना। इन हथियारों के गलत हाथों में जाने की स्थिति गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती थी।
हथियार बरामद होने से जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है, लेकिन घटना ने सैन्य प्रतिष्ठानों में अंदरूनी सुरक्षा और संवेदनशील हथियारों तक पहुंच की निगरानी के सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
हथियार बरामद, अब मकसद की तह तक पहुंचेगी जांच
फिलहाल पुलिस के हाथ आरोपी और चोरी हुए हथियार दोनों लग चुके हैं। चार AK-203, एक INSAS राइफल, सात पिस्तौल, मैगजीन, नाइट-विजन उपकरण और बड़ी संख्या में गोलियां बरामद होने से सबसे बड़ा खतरा टल गया है।
अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि आरोपी ने आखिर इतने हथियार क्यों चुराए और उसकी आगे की योजना क्या थी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि सैन्य परिसर की सुरक्षा में ऐसी कौन-सी कमजोरी रही जिसका फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया गया।
प्रारंभिक जांच में समय से पहले रिटायर किए जाने की नाराजगी को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन अंतिम मकसद विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। सिकंदराबाद कैंटोनमेंट की इस सनसनीखेज चोरी ने इतना जरूर दिखा दिया कि संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों में बाहरी खतरे के साथ 'इनसाइडर थ्रेट' को लेकर भी लगातार सतर्कता जरूरी है।
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