
Telangana तेलंगाना: निज़ामाबाद से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद धर्मपुरी अरविंद ने सोमवार को तेलंगाना की राजनीति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी आने वाले समय में कांग्रेस के लिए पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी जैसे नेता बन सकते हैं। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
धर्मपुरी अरविंद ने दावा किया कि जैसे सुवेंदु अधिकारी ने लगभग छह साल पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था, उसी तरह रेवंत रेड्डी भी भविष्य में अपनी पार्टी बदल सकते हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व निर्णयों से जोड़कर देखा।
सुवेंदु अधिकारी TMC छोड़ने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बन गए थे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे मजबूत विरोधियों में से एक माने जाते हैं। इसी उदाहरण का हवाला देते हुए BJP सांसद ने संकेत दिया कि तेलंगाना की राजनीति में भी इसी तरह का बदलाव देखने को मिल सकता है।
अरविंद ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने उन वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की है, जो लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े हुए थे और वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे थे। उनके अनुसार, यह निर्णय पार्टी के भीतर असंतोष का कारण बन सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी को तेलंगाना में आगामी विधानसभा चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अरविंद ने दावा किया कि जनता के बीच पार्टी की स्थिति कमजोर हो रही है और इसका असर चुनाव परिणामों पर साफ दिखाई देगा।
धर्मपुरी अरविंद ने अपने बयान में 2028-29 के राजनीतिक परिदृश्य का भी जिक्र किया और कहा कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में कांग्रेस को तेलंगाना में “अभूतपूर्व हार” का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस पहले भी 1985 और 1994 के चुनावों में बड़े अंतर से हार चुकी है।
उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस और BJP के बीच चल रही जुबानी जंग के तौर पर देख रहे हैं। तेलंगाना में हाल के वर्षों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा काफी तेज हुई है और दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर लगातार हमलावर नजर आते हैं।
फिलहाल कांग्रेस या मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।





