तेलंगाना

BJP ने रेवंत रेड्डी पर पलटवार किया, नितिन नबीन पर टिप्पणी को लेकर सियासी टकराव तेज

Kavita2
1 July 2026 3:50 PM IST
BJP ने रेवंत रेड्डी पर पलटवार किया, नितिन नबीन पर टिप्पणी को लेकर सियासी टकराव तेज
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Telangana तेलंगाना: राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर तीखा पलटवार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए इसे अहंकारपूर्ण और अस्वीकार्य बताया है।

मामला तब शुरू हुआ जब रेवंत रेड्डी ने एक टिप्पणी में यह कहा कि वे भाजपा नेता को उनके नाम से वास्तव में नहीं जानते। इस बयान को लेकर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक अनभिज्ञता नहीं, बल्कि विपक्षी दलों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया दर्शाता है।

भाजपा नेताओं ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि पार्टी में “चाटुकारिता और अहंकार” का माहौल बढ़ रहा है, जिसका परिणाम आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। भाजपा का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी जनता के बीच गलत संदेश देती है और राजनीतिक गरिमा को प्रभावित करती है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने इस मुद्दे पर पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि नितिन नबीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, जो कई राज्यों में सत्ता में है।

प्रेम शुक्ला ने अपने बयान में कहा कि “अहंकार के शिखर पर बैठे रेवंत रेड्डी को अपनी आंखें खोलनी चाहिए” और उन्हें भाजपा की संगठनात्मक ताकत को समझना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा देश के 22 राज्यों में सत्ता में है, जिससे उसकी राजनीतिक पहुंच और प्रभाव स्पष्ट होता है।

भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में तेलंगाना की पूर्व सत्ताधारी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) का भी जिक्र किया और कहा कि पहले भी राज्य में अहंकार की राजनीति देखने को मिली थी, जिसका परिणाम 2023 के विधानसभा चुनावों में हार के रूप में सामने आया।

उन्होंने संकेत दिया कि यदि कांग्रेस सरकार इसी तरह के रवैये के साथ आगे बढ़ती है, तो उसे भी राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। भाजपा का कहना है कि जनता अहंकार नहीं, बल्कि विकास और जवाबदेही चाहती है।

इस पूरे विवाद ने तेलंगाना की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और राजनीतिक माहौल गरमाता दिख रहा है। भाजपा ने इसे केवल व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि राजनीतिक असंवेदनशीलता का उदाहरण बताया है।

वहीं, कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल के करीब आते ही इस तरह के बयान और आरोप-प्रत्यारोप आम हो जाते हैं। इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है और पार्टियां एक-दूसरे पर हमला तेज कर देती हैं।

तेलंगाना में पहले भी भाजपा, कांग्रेस और बीआरएस के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिलती रही है। ऐसे में यह नया विवाद राज्य की राजनीति में एक और टकराव का संकेत माना जा रहा है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन इसके आगे बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों दलों की ओर से आने वाले बयानों पर अब राजनीतिक हलकों की नजर टिकी हुई है।

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