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हैदराबाद। तेलंगाना में मवेशियों की सिलसिलेवार चोरी से लेकर अलग-अलग राज्यों में मोबाइल दुकानों के शटर उठाकर लाखों रुपये के फोन चुराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का हैदराबाद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। हैदराबाद कमिश्नर टास्क फोर्स की जुबली हिल्स जोन टीम और खम्मम पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर गिरोह से जुड़े नौ आरोपियों को पकड़ा है। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई से कुल 17 मामलों का खुलासा हुआ है।इनमें तेलंगाना में मवेशी चोरी के 13 मामले और खम्मम तथा मध्य प्रदेश के उज्जैन में मोबाइल दुकानों में चोरी से जुड़े चार मामले शामिल हैं।पुलिस ने आरोपियों के पास से 15 मोबाइल फोन, तीन चार पहिया वाहन, 22 लाख रुपये नकद और एक नंबर प्लेट बरामद करने की जानकारी दी है। जांच में चोरी के मोबाइल फोन को मुंबई के नेटवर्क के जरिए बांग्लादेश तक पहुंचाए जाने का भी संदेह सामने आया है।पुलिस अब इस कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी कड़ी तलाशने के साथ फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
नौ आरोपी पकड़े गए
पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद तबरेज, मोहम्मद रफीक, मोहम्मद जुबैर अख्तर, मोहम्मद नवीद, पी. साई रेड्डी, फरहान शेख, मुबीन शेख, महबूब शेख उर्फ पापा और मोहम्मद जाहेद खान उर्फ राजा भाई के रूप में हुई है।पुलिस का आरोप है कि इनमें से कुछ आरोपी सीधे मवेशी चोरी में शामिल थे, जबकि कुछ मोबाइल फोन चोरी और चोरी का माल आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़े थे।जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था और जरूरत के हिसाब से अपराध का तरीका बदलता था।तीन अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने इनमें अबू उर्फ अफजल, मुंबई निवासी कालू और बांग्लादेश के ढाका से जुड़े जासिम को फरार बताया है।
तेलंगाना में 13 मवेशी चोरी के मामले
पुलिस के मुताबिक गिरोह ने तेलंगाना के नागरकुरनूल, महबूबनगर और नलगोंडा जिलों के साथ फ्यूचर सिटी क्षेत्र में मवेशी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया।मोहम्मद तबरेज और मोहम्मद रफीक को इन वारदातों में प्रमुख आरोपियों के रूप में चिह्नित किया गया है। मोहम्मद जुबैर अख्तर और मोहम्मद नवीद पर भी कुछ घटनाओं में शामिल होने का आरोप हैपुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रात के समय सुनसान क्षेत्रों में स्थित पशु बाड़ों और मवेशियों को रखने वाली जगहों की पहचान करते थे।इसके बाद मौका देखकर मवेशियों को वाहनों में भरकर वहां से ले जाया जाता था।
मवेशियों को दिया जाता था बेहोशी का इंजेक्शन
इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू मवेशियों को कथित तौर पर बेहोश करने के लिए दवा का इस्तेमाल है।
पुलिस का आरोप है कि पी. साई रेड्डी नाम का आरोपी गिरोह को Xylazine इंजेक्शन उपलब्ध कराता था। यह एक पशु चिकित्सा से जुड़ी दवा है, जिसका इस्तेमाल पशुओं को शांत या बेहोश करने के लिए किया जा सकता है।आरोप है कि चोरी के दौरान मवेशी शोर न करें और उन्हें वाहन में आसानी से ले जाया जा सके, इसके लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता था।इसके बाद चोरी किए गए मवेशियों को अलग-अलग बाजारों में कथित तौर पर कम कीमत पर बेच दिया जाता था।इन सभी आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगी।
त्योहारों के दौरान मवेशियों को बनाया निशाना
पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह ने रमजान और बकरीद के आसपास मवेशियों की मांग को देखते हुए चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया।पुलिस का दावा है कि इस अवधि में आरोपियों ने कई इलाकों की रेकी की और ऐसे स्थान चुने जहां रात के समय निगरानी अपेक्षाकृत कम रहती थी।तेलंगाना में सामने आए 13 मवेशी चोरी के मामलों को पुलिस इसी गिरोह से जोड़ रही है।जब त्योहारों के बाद मवेशियों की मांग कम हुई तो गिरोह ने कथित तौर पर अपना अपराध का तरीका बदल दिया।
इसके बाद मोबाइल दुकानों पर नजर
पुलिस के मुताबिक मवेशी चोरी से हटकर आरोपियों ने मोबाइल फोन की दुकानों को निशाना बनाना शुरू किया।जांच में दावा किया गया है कि मोहम्मद तबरेज पहले भी सेंधमारी और शटर उठाकर चोरी करने के मामलों में शामिल रहा है। मवेशियों की मांग कम होने के बाद उसने अपने पुराने संपर्कों से दोबारा संपर्क किया।इसके बाद मोबाइल दुकानों में चोरी की योजना बनाई गई।आरोपियों ने ऐसे शोरूम चुने जहां बड़ी संख्या में महंगे स्मार्टफोन उपलब्ध रहते थे और रात में दुकान बंद होने के बाद शटर उठाकर अंदर प्रवेश किया जा सकता था।
खम्मम के मोबाइल शोरूम में चोरी
पुलिस के अनुसार 11 जून को गिरोह ने तेलंगाना के खम्मम में स्थित एक मोबाइल फोन शोरूम को निशाना बनाया।आरोप है कि गिरोह के सदस्यों ने दुकान का शटर उठाया और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन चोरी कर लिए।इसके बाद चोरी के मोबाइल सीधे स्थानीय बाजार में बेचने के बजाय दूसरे नेटवर्क को सौंप दिए गए।पुलिस का कहना है कि इसके पीछे उद्देश्य फोन को ऐसे इलाके में पहुंचाना था जहां उन्हें ट्रैक करना और बरामद करना कठिन हो सके।जांच में इसी कड़ी से मुंबई स्थित कथित नेटवर्क का पता चला।उज्जैन में भी दो दुकानों को बनाया निशाना
खम्मम की घटना के बाद गिरोह के सदस्य मध्य प्रदेश पहुंचे।
पुलिस का आरोप है कि 10 जुलाई को उज्जैन के फ्रीगंज इलाके में दो मोबाइल फोन दुकानों में इसी तरह शटर उठाकर चोरी की गई।इन वारदातों में भी महंगे मोबाइल फोन को निशाना बनाया गया।पुलिस जांच में तेलंगाना और मध्य प्रदेश में हुई मोबाइल दुकान चोरी की घटनाओं के बीच कथित संबंध मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।इसके बाद हैदराबाद और खम्मम पुलिस ने संयुक्त रूप से नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान शुरू की।
मुंबई में बनाया था चोरी के मोबाइल का नेटवर्क
जांच में पुलिस को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मुंबई में मिली।पुलिस का आरोप है कि चोरी के मोबाइल फोन को फरहान, मुबीन और महबूब जैसे कथित बिचौलियों के जरिए मोहम्मद जाहेद खान उर्फ राजा भाई तक पहुंचाया जाता था।जाहेद के बारे में पुलिस का दावा है कि वह पहले मोबाइल फोन मैकेनिक के रूप में काम करता था और बाद में पुराने मोबाइल फोन के कारोबार में शामिल हुआ।जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह बड़ी संख्या में चोरी के फोन खरीदने और आगे बेचने वाले नेटवर्क से जुड़ गया।पुलिस के मुताबिक उसके मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में संपर्क थे।
बांग्लादेश तक पहुंचाए जाते थे मोबाइल
पुलिस का दावा है कि मुंबई पहुंचने के बाद चोरी के कुछ मोबाइल फोन को भारत से बाहर भेजा जाता था।जांच में सामने आए कथित नेटवर्क के मुताबिक फोन को मुंबई में पैक करने के बाद सड़क या बस के जरिए कोलकाता की तरफ भेजा जाता था।इसके बाद इन्हें कथित तौर पर अवैध रास्तों से बांग्लादेश पहुंचाया जाता था।पुलिस ने इस नेटवर्क में बांग्लादेश के एक व्यक्ति की भूमिका की भी जांच शुरू की है। संबंधित व्यक्ति फिलहाल फरार बताया गया है।हालांकि कितने मोबाइल वास्तव में बांग्लादेश पहुंचे, इसका पूरा आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
हवाला लेनदेन के एंगल की भी जांच
जांच एजेंसियां इस मामले में कथित हवाला लेनदेन की संभावना भी देख रही हैं।पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चोरी के मोबाइल बेचने से मिलने वाली रकम आरोपियों तक किस माध्यम से पहुंचती थी और क्या इसमें अनौपचारिक धन हस्तांतरण नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।फिलहाल हवाला से जुड़ा पहलू जांच के स्तर पर है। इसकी अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
गुजरात में भी चोरी की थी योजना
पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने गुजरात में भी मोबाइल दुकान में चोरी करने की योजना बनाई थी।इसके लिए कुछ सदस्यों ने इलाके की रेकी की, लेकिन पुलिस की मौजूदगी देखकर योजना छोड़ दी गई।रिपोर्ट के मुताबिक वहां से निकलते समय कुछ आरोपी दुर्घटना का भी शिकार हुए थे और एक संदिग्ध के हाथ में चोट आई थी।पुलिस ने संदिग्ध वाहन से फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर, डुप्लीकेट नंबर प्लेट और कथित तौर पर चोरी में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण मिलने की बात कही है।
हैदराबाद में अगली वारदात से पहले दबोचा
पुलिस के मुताबिक गिरोह ने इसके बाद हैदराबाद में एक और मोबाइल दुकान को निशाना बनाने की तैयारी की।इसके लिए एक अन्य कार की व्यवस्था की गई थी।लेकिन वारदात को अंजाम देने से पहले ही टास्क फोर्स को सूचना मिल गई। इसके बाद आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और उन्हें पकड़ लिया गया।पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई के कारण हैदराबाद में प्रस्तावित एक और चोरी को रोका गया।
22 लाख नकद समेत सामान जब्त
संयुक्त अभियान के दौरान पुलिस ने 22 लाख रुपये नकद, 15 मोबाइल फोन, तीन चार पहिया वाहन और एक नंबर प्लेट जब्त करने की जानकारी दी है।पुलिस अब जब्त मोबाइल और वाहनों की जांच कर यह पता लगा रही है कि उनका किन-किन वारदातों में इस्तेमाल हुआ था।इसके अलावा चोरी किए गए बाकी मोबाइल और संपत्ति की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
17 मामलों के खुलासे का दावा
हैदराबाद पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से कुल 17 मामलों का खुलासा हुआ है। इनमें 13 मवेशी चोरी और चार मोबाइल दुकान चोरी के मामले शामिल हैं।यह कार्रवाई हैदराबाद कमिश्नर टास्क फोर्स के अधिकारियों की निगरानी में जुबली हिल्स जोन टीम और खम्मम पुलिस के समन्वय से की गई।पुलिस अब फरार संदिग्धों की तलाश, कथित अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नेटवर्क और संभावित वित्तीय लेनदेन की जांच आगे बढ़ा रही है।मामले में पुलिस ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में पेश साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम रूप से तय होगी।
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